ऋषभ शेट्टी (Rishab Shetty) और सप्तमी गौड़ा (Sapthami Gowda) की ‘कांतारा’ (Kantara) गुजरते दिनों के साथ कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है। इतने कम बजट में बनी फिल्म इतना बड़ा कलेक्शन करेगी, किसी से नहीं सोचा था। यह ऐसी फिल्म साबित हुई है जैसे छोटे खोखे में बड़ा बारूद। फिल्म ने साबित कर दिया है कि कहानी में अगर दम हो तो कम बजट फिल्म भी तहलका मचा सकती है। कांतारा भी ऐसी ही फिल्म है जिसने पहले साउथ इंडिया में धमाल मचाया और देश और दुनिया के बाकी हिस्सों में। 

फिल्म हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। फिल्म को क्रिटिक्स और ऑडियंस दोनों का ही भरपूर प्यार मिला है। इसी की बदौलत फिल्म अब 255 करोड़ रुपये के कलेक्शन को भी पार कर चुकी है। इसने 2022 की सबसे हिट साबित हुई टॉप 5 फिल्मों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। यह फिल्म द कश्मीर फाइल्स की कमाई से भी आगे निकल गई है। कश्मीर फाइल्स ने 252 करोड़ रुपये की कमाई की थी जिसको कांतारा ने पार कर लिया है। अब कांतारा इस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में 5वें नम्बर पर पहुंच चुकी है। यहां तक कि फिल्म के लिए ऑस्कर की मांग भी की जा चुकी है। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तो यहां तक कहा जा रहा है कि फिल्म वर्ल्डवाइड कलेक्शन में 275 करोड़ रुपये कमा चुकी है। फिल्म को रिलीज हुए 5 हफ्ते बीत चुके हैं और यह लगातार आगे बढ़ रही है। इस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में पहले नम्बर पर KGF 2 है जिसने अब तक 860 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। उसके बाद साउथ की ही फिल्म RRR है जिसने 775 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। तीसरे नम्बर पर आती है ब्रह्मास्त्र, जिसने 268 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। इस लिस्ट में चौथी फिल्म पोन्नियिन सेल्वन है जिसने 265 करोड़ रुपये कमाए हैं। इसके बाद कांतारा है जिसने 255 करोड़ रुपये के करीब करोबार कर लिया है। फिल्म की कमाई का ग्राफ अभी भी ऊपर की ओर जा रहा है। जबकि फिल्म महज 16 करोड़ रुपये में बनी है। 

फिल्म कांतारा की कहानी (Film Kantara Full Story )
फिल्म की कहानी सन् 1847 में शुरू होती है। एक राजा जो काफी बेचैन रहता था, एक दिन जंगल में जाता है जहां उसे वहां के स्थानीय देवता पंजुरी की मूर्ति दिखाई पड़ती है। मूर्ति को देखने के बाद राजा मन अपने आप ही शांत हो जाता है। मूर्ति से प्रभावित वह राजा उसे अपने महल में लाने की इच्छा करता है। इससे पहले कि वह मूर्ति को लेकर जाता, गांव के लोग वहां पहुंच जाते हैं और मूर्ति को ले जाने से मना कर देते हैं। 

गांव वालों का कहना था कि राजा जो चाहे ले जा सकते हैं, लेकिन उनके देवता की मूर्ति को ले जाने का उन्हें अधिकार नहीं है। कभी एक चमत्कार होता है और पंजुरी देव एक गांववाले के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। वे राजा से कहते हैं कि मैं तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूं, लेकिन एक शर्त है। 

शर्त ये है कि जहां तक मेरी (पंजुरी देवता) की चीख जाएगी, वहां तक की जमीन राजा को इन गांव वालों को देनी होगी, ताकि देवता के जाने के बाद भी वह खुशहाल रह सकें। राजा जमीन देने के लिए राजी हो गया तो पंजुरी देव भी राजा के साथ जाने के लिए तैयार हो गए। यहां पर पुंजरी देव ने राजा से पहले ही साफ तौर पर कह दिया कि अगर राजा या उसके किसी वंशज ने यह जमीन वापस लेने की कोशिश की तो उसका परिणाम बहुत भयंकर होगा। 

उसके बाद कहानी सीधे सन् 1970 में शुरू होती है। उस वक्त के एक राजा को जमीन पर लालच आ जाता है और वर जमीन गांव वालों से वापस छीनने की कोशिश करता है। यहां पर भूत कौला का जिक्र आता है जो मंगलौर के तटीय इलाकों में एक प्रकार की पूजा होती है, जिसे एक नर्तक करता है। इस पूजा करने वाले शख्स के अंदर पंजुरी देव के आने की मान्यता है। 

राजा इसी भूत कौला के दौरान जमीन को वापस मांगता है लेकिन नर्तक के अंदर पंजुरी देव आ जाते हैं। देवता जमीन देने को राजी हो जाते हैं लेकिन साथ ही कह देते हैं कि उसके बाद राजा के वंश का विनाश हो जाएगा। हुआ भी ऐसा ही, राजा के वंशज की कुछ दिनों बाद ही मौत हो जाती है। 

उसके बाद कहानी 1990 में शुरू होती है जिसमें राजा के अन्य वंशज अच्युत कुमार की नजर भी इसी जमीन पर पड़ी होती है। यहां ऋषभ शेट्टी गांव का रखवाला बना हुआ है। सप्तमी गौड़ा उनकी प्रेमिका बनी हैं। क्या ये दोनों मिलकर राजा के वंशज से गांव की जमीन को बचा पाते हैं, यह आपको सिनेमाघरों में जाकर पता लगेगा। अगर आप एक विजुल ट्रीट फिल्म देखना चाहते हैं तो कांतारा को मिस न करें। फिल्म का अंत सीक्वल की गुंजाइश के साथ होता है। फिल्म का दम इसी से पता लग जाता है कि इसे आईएमडीबी पर 9.5 रेटिंग दी गई है। 

 



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