उत्तर प्रदेश

देश के कोने-कोने में छिपे इन गद्दारों को महंगा पड़ा शहीद जवानों के खिलाफ लिखना, किसी की नौकरी गयी, तो किसी के खिलाफ दर्ज़ हुई एफआईआर देखे कौन कौन है गद्दार

पुलवामा अटैक के बाद देश तमाम लोगों ने अपने-अपने तरीके से शहीदों को श्रद्धांजलि दी। शहीदों के लिए सोशल मीडिया पर देश की आवाज़ में आवाज़ मिलाई। लेकिन ऐसे बहुत से गद्दारों की पहचान भी हुई, जिन्होंने फेसबुक-ट्वीटर न सिर्फ आतंकी हमले का समर्थन किया, बल्कि शहीदों और सुरक्षाबलों का अपमान किया, यहां तक कि कईंयों ने पाकिस्तान का दिल खोलकर समर्थन भी किया। धमकियां दीं..।

लेकिन अब देश बदल चुका है, सोशल मीडिया पर ही देशभक्तों ने Naming-Shaming कैंपेन चलाया। इनकी पहचान करके इनके Employer कंपनी को टैग किया, जिस कॉलेज में पढ़ते थे, उनको शिकायतें की गयीं। पुलिस में शिकायत दर्ज की गयी…. नतीज़ा ये हुआ कि देश भर के कोने-कोने में छिपे बैठे 2 दर्जन से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई की गयी। बाद में तमाम लोग माफी मांगते नज़र आये। देखिए एक-एक करके इन आरोपियों की लिस्ट-

1. रायपुर में रहने वाली अर्बन नक्सल सुरभी सिंह ने फेसबुक पर सुरक्षाबलों के खिलाफ जहर उगला। शिकायत करने के बाद सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च ने उनको नौकरी निकाल दिया।

2. चंडीगढ़ में रहने वाले मीर इकबाल ने फेसबुक पर उल्टा-सीधा लिखा, उनके खिलाफ भी शिकायत की गयी, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने मामले की छानबीन कर रही है।

3. जयपुर की प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली कश्मीरी तवलीन मंजूर ने जश्न मनाने का स्टेट्स डाला, तो यूनिवर्सिटी ने उनको और उनकी 3 और सहेलियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

4. राजस्थान के जिला प्रतापगढ़ में एक स्कूल प्रिंसिपल मोहम्मद अजमेरी ने न सिर्फ शहीदों पर अभद्र टिप्पणी की, बल्कि स्कूल की प्रार्थना सभा में सुरक्षाबलों पर अभद्र बातें कहीं। इसके लिए उनको सरकार ने सस्पेंड कर दिया, साथ ही गिरफ्तार भी कर लिया गया।

5. आसाम में आईकॉन कॉमर्स कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर पपरी बैनर्जी ने आतंकी हमले का समर्थन किया, बाद में लोगों का मजाक उड़ाया। कॉलेज ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पपरी को सस्पेंड कर दिया। बाद में पपरी ने फेसबुक पर खेद भी व्यक्त किया।

6. बाला हैदराबाद में ऑनलाइन मीडिया के पत्रकार हैं, इन्होंने न सिर्फ सुरक्षाबलों पर अभद्र आरोप लगाया। जबकि अलगाववादी बातें भी लिखी। इसके खिलाफ हैदराबाद में रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है। इसके बाद बाला ने अपना अकाउंट बंद कर दिया, हालांकि इसकी कंपनी न्यूजमिनट की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

7. मोहम्मद अशरफ श्रीनगर में ह्यूंडई शोरूम में नौकरी करता है, शिकायत करने पर कंपनी ने अशरफ को तुरंत नौकरी से निकाल बाहर किया।

8. वैभव शमशेर राणा ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट था, फेसबुक पर जश्न मनाते कईं कमेंट किये। यूनिवर्सिटी ने शमशेर को न सिर्फ सस्पेंड कर दिया। बल्कि एफआईआर भी दर्ज करा दी।

9. पश्चिम बंगाल के देबजीत भट्टाचार्जी ने बंगाली में (रोमन लैटर में ) कश्मीर में अलगाववादियों का समर्थन किया। इसके लिए देबजीत पर एफआईआर दर्ज कर दी गयी है।

10. मऊ, यूपी में रहने वाले मो. ओसामा ने शहीदों का अपमान किया और पाकिस्तान का समर्थन किया। यूपी पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज करते हुए। मो. ओसामा को गिरफ्तार कर लिया।

11. देहरादून सुभारती यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले राशिद ने पुलवामा अटैक के बाद जश्न मनाने का स्टेट्स डाला। शिकायत मिलने पर यूनिवर्सिटी ने तुरंत राशिद को निलंबित कर दिया।

12. श्रीनगर में रहने वाले रियाज़ अहमद वानी अक्सर अपने फेसबुक पर आतंकियों के पक्ष में स्टेट्स डालता रहता था। पुलवामा हमले के बाद भी रियाज ने ऐसा ही स्टेट्स डाला। लेकिन इस बार उसको भारी पड़ा प्राइवेट कंपनी मैकलॉयड ने उनको नौकरी से बाहर कर दिया।

13. बंगलुरू में रहकर नौकरी करने वाले कश्मीरी आबिद मलिक फिदायीन आतंकी के पक्ष में स्टेट्स डाला। हमले के बाद जश्न मनाया। इसके बाद बंगलुरू पुलिस ने देशद्रोह की धाराओं में आबिद पर केस दर्ज कर लिया।

14. निधि सेठी, दिल्ली एनडीटीवी में डिप्टी एडिटर थी, शहीदों पर तंज कसा। एनडीटीवी ने निधि को तुंरत 2 हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया और जांच बिठा दी। इसके बाद निधि ने अपना फेसबुक अकाउंट भी डीलिट कर दिया।

15. लखनऊ में रज़ाब ने फेसबुक-व्हाट्सअप पर पुलवामा हमले की खुशियां मनाने के पोस्ट डाले। कॉलेज ने तुरंत उनको निष्कासित कर दिया। साथ ही रज़ाब पर एफआईआर दर्ज की ली गयी और गिरफ्तार कर लिया गया।

16. लुधियाना में रहने वाले रईस खान ने फेसबुक पर धमकी भरे पोस्ट डाले, इसके बाद पंजाब पुलिस उसकी खबर ले रही है।

ऐसे और भी काफी नाम हैं, जिन्होंने ऐसे ही एंटी-इंडिया पोस्ट किया है। इनके खिलाफ सोशल मीडिया पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित कंपनी को सूचित किया जा रहा है। जिसका मतलब है आने वाले दिनों में ये लिस्ट और लंबी होगी। सोशल मीडिया पर देशद्रोहियों के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन की खास बात ये है कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब स्वस्फूर्त तरीके से ऐसे गद्दारों के खिलाफ आम भारतीयों ने आवाजा उठाई है।