इटावा उत्तर प्रदेश

सपा नेता अधिवक्ता आदित्य दुबे का निधन हजारो नाम आखो के मद्य हुआ अंतिम संस्कार

इटावा 1 मार्च (आशुतोष/ बृजेश कुमार) सपा के वरिष्ठ नेता अधिवक्ता आदित्य दुबे का आज हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया। 65 वर्षीय स्वर्गीय दुबे का अंतिम संस्कार यमुना तट स्थित श्मशान घाट पर हजारों नम आंखों के मध्य हुआ। मुखाग्नि उनके जेष्ठ पुत्र राजा दुबे ने दी।
सपा नेता आदित्य दुबे सत्यनारायण दुबे एडवोकेट पूर्व मंत्री के जेष्ठ पुत्र एवं अधिवक्ता उत्तम दुबे के बड़े भाई थे वह प्रखर वक्ता एवं मृदुभाषी थे जो सपा से पूर्व कांग्रेस में रहते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर चुके थे। वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे जो स्वस्थ होकर घर आ गए थे लेकिन आज प्रातः 6 बजे करीब उन्हें दिल का दौरा पड़ा तो परिजन तत्काल चिकित्सालय लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जिसने भी सुनी वह उनके निज निवास घटिया अजमत अली पहुंचा। स्वर्गीय दुबे अपने पीछे 3 पुत्र और पत्नी तथा वृद्ध माता पिता एवं परिवारजनों को बिलखते छोड़ गए।
इस घटना की खबर पाते ही प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव उर्फ अंशुल, सदर विधायक सरिता भदौरिया, पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया,सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजीव यादव पूर्व चेयरमैन पालिका इटावा कुलदीप गुप्ता उर्फ संटू, फुरकान अहमद, सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव काग्रेस जिलाध्यक्ष उदय भान सिंह यादव,प्रमोद संखवार, बसपा नेता बीरू भदौरिया, सर्वेश चैहान भुल्लन चैहान सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता गण पत्रकार साथी चिकित्सक गण विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
गत दिवस जिला बस्ती में वरिष्ठ अधिवक्ता जग नारयण यादव की कुछ अज्ञात हमलवारों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दिय जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एडवोकेट अश्वनी सिंह ने सम्पूर्ण भारत वर्ष के अधिवक्ताओं से अपील की कि आज भी समय है हम ये न सोचें कि मेरे जिले का मामला नही है ये जिले की बात नही है ये हमारे अधिवक्ता समाज की बात है मेरी इस सरकार से माग है कि अधिवक्ता के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और हमारे म्रतक अधिवक्ता के परिवार को सरकार द्वारा 5000000 पचास लाख रुपया दिया जाए और परिवार के एक व्यकित की सरकारी नौकरी दी जाए क्योंकि अधिवक्ता की हत्या कचहरी परिसर मे हुई है और इसके साथ वकालत का कार्य करके वो कोर्ट से लौट रहे थे। यदि सरकार ऐसा नही करती है तो सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हो जाये और फिर भी न माने सरकार तो सम्पूर्ण भारतवर्ष के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हो जाये ।अब ज्यादा क्या लिखूं सभी अधिवक्ता समझदार है

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