उत्तर प्रदेश जालौन

हुसैन तुमको ज़माना सलाम कहता है

उरई (जालौन)(.गोविंद सिंह दाऊ):- ।तन्ज़ीम ”मुस्लिम वैल्फेयर एसोसिएशन” के ज़ेरे एहतिमाम सरज़मीने उरई के मोहल्ला तिलक नगर स्थित पीरो वाली मस्जिद के मैदान बरकाती ग्राउन्ड मे 42वां सालाना दस रोज़ा (दस दिवसीय) इजलास ”पैग़ामे शहीदे आज़म” की महफिले 12 सितम्बर से 21 सितम्बर तक आयोजित हुई I महफिलो का आग़ाज़ तिलावते कुरआन से हाफिज़ फज़ले अज़ीम रहमानी व संचालन डा० मु० नासिर बेग़ ने किया I आखिरी महफिल यौमे आशूरा की 21 सितम्बर को सुबह 9 बजे से 1 बजे तक हुई I महफिल मे हाफिज़ मोनिस चिश्ती , कलीम दानिश व कारी इस्राईल अख्तर ने नात व मनकबत पढ़ी I इसके बाद बिहार से आयें मुकर्रिरे खुसुसी हज़रत अल्लामा सैय्यद आरफीन अस्दाक़ साहब ने तकरीर की और फरमाया जब हज़रत इमाम मुस्लिम को कूफा मे जिस रोज़ शहीद किया गया उसी रोज़ हज़रत इमाम हुसैन मक्का से कूफा को रवाना हो पड़े, आपके अहले बैअत मवाली और खुद्दाम कुल 82 लोग आपके साथ थे यह मुख्तसर सा अहले बैअत का काफिला मक्का से रूखसत हुआ तो मक्का मुकर्रमा का बच्चा बच्चा अहले बैअत के इस काफिले को रूखसत होता देखकर आबदीद और गमगीन हो रहा था, हज़रत इमाम हुसैन का यह काफिला जब मकामे शकुक मे पहुंचा तो कूफा से आने वाले एक आदमी ने हज़रत इमाम हुसैन को बताया की कूफियों ने बेवफाई की और हज़रत मुस्लिम शहीद कर दिये गये, हज़रत इमाम हुसैन यह खबर सुनकर बहुत ग़मग़ीन हुये , हज़रत इमाम हुसैन महज़ हुज्जत के लिये उन लोगो की दावत पर वहां आये थे और सिर्फ दीन की हिमायत के जज़्बा आपको आगे ले गया, जो गुस्ताख आपका मुद्दा हुकुमत हासिल करना बताते है वह गौर करे बकौल उनको आपका यही मुद्दा होता है तो आप उस बेसर व सामानी के साथ हरगिज़ सफर न फरमाते जबकि आपको इल्म था की दुश्मन बेहद कवी है और हज़ारो की तदाद मे लश्कर रखता है, इधर लश्कर अज़ीम उधर चंद थोड़े पाक लोग क्या कोई अक्ल का दुश्मन कह सकता है की इसे बेसर व सामानी के साथ आप सल्तनत हासिल करने निकले , बल्कि न अपनी आन की खतिर, न अपनी शान की खातिर, वह मैदां मे निकल आयें फक्त इमान की खातिर..
️हज़रत इमाम को कूफा की रवानगी की खबर पाकर इब्ने ज़्याद ने हुर्र इब्ने रुबाही की क्यादत मे एक लश्कर आगे भेज दिया था, हुर्र इब्ने रूबाही मर्द सईद ने हज़रत इमाम हुसैन को मशवरा दिया की वह मसतुरात का बहाना फरमाकर रात को अलाहदा उतरे और रात ही को कही तशरिफ ले जायें। हज़रत इमाम हुसैन ने यही किया, रात को जब यज़ीदी लश्कर सो गया तो आपने वहां से कूच किया,
अंधेरी रात मे मालूम न हुआ की किधर जा रहे है, सुबह को एक मैदान पहुंचे इमाम हुसैन ने पूछा की तुममे से किसी को इस जगह का नाम मालूम हैं तो एक ने बताया की इस जगह को कर्बला कहते है , हज़रत इमाम हुसैन ने मकामे कर्बला मे क्याम फरमाया तो इब्ने ज़्याद ने एक खत हज़रत इमाम हुसैन की तरफ इस मज़मून का भेजा की या तो यज़ीद की बैअत कीजिये या लड़ने को तैयार हो जाइये,
हज़रत ने उस खत को पढ़कर फेंक दिया और कासिद से फरमाया मेरे पास इसका कोई जवाब नही, इब्ने ज़्याद यह सुनकर गुस्से मे आ गया, इब्ने सअद को बुलाकर कहा की तुम एक मुद्दत से मुल्क के हाकिम बनने की तमन्ना रखते हो, लो आज मौका है, तुम हुसैन के मुकाबले के लिये जाओ और हुसैन को मजबूर करो की वह यज़ीद की बैअत करे वरना उसका सर काटकर ले आओ, दुनियां की दौलत के लालची इब्ने सअद मुल्क की हुकुमत की लालच मे आकर हज़रत इमाम हुसैन के मुकाबले को तैयार हो गया, कर्बला मे पहुंचकर उसने हज़रत इमाम हुसैन से पूछा की आप यंहा किस वास्ते से आये है , आपने फरमाया कूफियों ने खत लिखकर मुझे बुलाया मै खुद यहां नही आया I हज़रत इमाम हुसैन ने मैदान-ए-कर्बला मे नहरे फुरात के किनारे अपने खेमे गाड़े थे, मगर मुहर्रम के सातवीं तारीख को इब्ने सअद की फौज ने जो 22 हज़ार की तादाद मे थी, नहरे फुरात को घेर लिया और हज़रत इमाम को पानी लेने से रोक दिया, 10 मुहर्रम जुमा के दिन नमाज़ मे सजदे की हालत में यज़ीदियो ने इमाम हुसैन को शहीद कर दिया I इसके बाद मौलाना मुश्ताक साहब ने भी खिताब किया और वाक्याते कर्बला पर रोशनी डाली I इसके बाद सलातो सलाम और दुआ पर मेहफिल का इख्तिमाम हुआ और कमेटी के जनरल सेकेट्री शारिक़ बेग़ बरकाती ने आये हुये सभी अकीदतमंदो का शुक्रिया अदा किया I महफिल मे मुख्य रूप से अब्दुल रज़्ज़ाक , वासिक़ बेग़ बरकाती, शाहिद चिश्ती, सै० इस्राफील , तौसीफ रहमानी , हाजी अब्दुल वहाब , मकसूद अहमद , आकिल , कामिल , तालिब , इमरान , पन्नू , मुख्तार अंसारी , आसिफ , पम्मू , शारिफ , जावेद , दानिश बेग , रईस अहमद , रूमान , वामिक बेग आदि लोग मौजूद रहे I

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