कन्याभ्रूण हत्या से बढ़कर दूसरा कोई पाप नहीं–वेदांती महाराज

० ग्राम औंता में चल रही नौ दिवसीय रामकथा में उमड़ रही भीड़

उरई (जालौन)(गोविंद सिंह दाऊ):-. । जिला मुख्यालय उरई से नौ किलो मीटर दूर ग्राम औंता में नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव एवं लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में वाराणसी से पधारे श्रीमंत जगतगुरु अंनानद आचार्य स्वामी डा. रामकमल दास वेदांती महाराज ने अपने सार धार्मिक प्रवचनों में रामकथा के अन्तर्गत प्रवचनों में रामकथा में बताया कि मनुष्य का प्रथम कर्तव्य अपनी आत्मा को परमात्मा से मिला देने में ही है लेकिन यह कार्य तभी संभव है कि जब मनुष्य ने जीवन से दुरासा रूपी ताड़का का वंध हो जाये तथा जड़ता रूपी अहिल्या का उदधार होने पर ही ईश्वर साक्षात की संभावना है, स्वामी जी ने बताया कि दस हजार हाथियों का बल रखने वाली ताड़का को एक ही बाण से परमधाम को पहुंचा दिया और फिर उन्होंने महर्षि गोतम के श्राप से पत्थर रूप में पड़ी हुई अहिल्या का भी उद्धार किया। अहिल्या उद्धार की कथा करते हुए स्वामी श्री वेदांती जी ने कहा कि जाने अनजाने में हर इंसान से गलतियां हो जाती है लेकिन जो गलतियों से शिक्षा लेकर उन्हें दुबारा न दोहराये वो ही सम मुख में महापुरुष है।राजा जनक और महर्षि विशवामित्र के मिलन के अद्भुत प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए स्वामी वेदांती जी महाराज ने बताया कि राजा जनक इतने बड़े ज्ञानी थे वे राम और लक्ष्मण को देखते ही पहचान गये वे भगवान है इस लिए उन्होंने आशचर्य चकित होकर विशवामित्र जी से श्री राम और लक्ष्मण के बारे में पूछा कि वे कौन है राजा जनक एक तत्वनिष्ठा ज्ञानी थे इस लिए उन्होंने धनुष यज्ञ के माध्यम से माध्यम से समस्त प्राणियों को यह प्रेरणा दी कि जब तक हमारे और आपके जीवन में अभिमान रूपी धनुष रखा है तब तक भगवान राम की प्राप्ति संभव नहीं है। इस अभिमान का खण्डन केवल ईश्वर ही कर सकता है।स्वामी जी ने आज पर्यावरण व कन्या भ्रूण हत्या पर भी प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के सभी संदग्रंथ बच्चों, परवतों, नदियों की संरक्षण की बात करते है। इस लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवरधन जैसे पहाड़ वृक्षों व जमुना को कालियनाग के विषालों के जहर से दूषित होने से बचाया था विषेले खाद्य पदार्थों के कारण पृथ्वी की मिट्टी को हम जहर के रुप में परिणीत कर रहे है। अतः हमें पृथ्वी को उपलब्ध बनाने के लिए प्राकृतिक खाद्य का ही प्रयोग करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि धार्मिक सदग्रन्थों में स्त्री हो या पुरुष सभी को समान रूप से देखा गया है मां के गरभ के अंदर कन्या भ्रुण हत्या से बढ़कर और कोई दूसरा पाप नहीं। इस विशाल कार्यक्रम में क्षेत्र के चारों तरफ से आ रही जनता ने पूरे पण्डाल को भर रखा है और भक्तगण यज्ञ की परिक्रमा कर अत्याधुनिक लाभ उठा रहे है।

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