पति की लम्बी उम्र का मांगा वरदान

उरई (जालौन)।(गोविंद सिंह दाऊ):-। हर साल जेठ की अमावस्या को भारतीय महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं।
पौराणिक प्रमाणित और प्रचलित कथा के अनुसार पतिव्रता स्त्री सावित्री ने यह जानते हुए कि मैं जिससे विवाह कर रही हूं उनकी अल्प आयु है जब उनसे यह बात पूछी गई तो उनका उत्तर था कि भारतीय नारी एक बार जिसको पति मान लेती है उसीसे विवाह करती है। मेने सत्यवान को ही अपना पति मान लिया है ।
समय वीता विधि के अनुसार सत्यवान की मृत्यु हो गई सावित्री अपने पति के सर को गोद में रखें एक वट वृक्ष के नीचे बैठी थी उसी समय भगवान यमराज आपने कई यम दूतों के साथ आए और सत्यवान के प्राण लेकर चल दिए कुछ दूर चलने के बाद जब यमराज ने देखा तो सावित्री भी पीछे पीछे आ रही थी यमराज ने कहा पृथ्वी पर तुम्हारा पति के साथ इतना ही समय था तुम वापस लौट जाओ मगर सावित्री नहीं लौटी और कहा में वही रहूंगी जहां मेरे पति रहेंगे ये भारतीय नारी का कर्तव्य है जिस पर यमराज ने कहा ठीक है तुम मुझसे तीन वर मांग लो और वापस चली जाओ सावित्री ने पहले वर में अपने अंधे सांस ससुर की ज्योति मांगी दूसरे वर में अपने ससुर का खोया हुआ राज्य मांगा और तीसरे वर में १०० पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा यमराज ने कहा तथास्तु। सावित्री को हो पुत्रों की मां बनने के वरदान देने से यमराज को उनके पति के प्राण लौटाने पड़ें। और सावित्री वापस उसी वट वृक्ष के नीचे आ गई जहां कुछ देर बाद ही उनके पति जीवित हो गए।तब से सभी सुहागन भारतीय स्त्रियां अपने पति की लम्बी उम्र के लिए यह वृत करने लगी। जिसके अनुसार महिलाएं वृत रखकर वट वृक्ष( बरगद) की विधि विधान से पूजा करती हैं तथा सरबत खरबूजा अर्पित कर वृक्ष में कच्चे धागे को लपेटते हुए परिकृमा कर अपने सुहाग को अमर करने का वरदान मांगती है।
नगर में प्रातः छै बजे से ही उक्त पूजा प्रारंभ हो गई सजी धजी सुहागन महिलाएं हाथ में जल एवं पूजा की थाली लेकर वट वृक्ष के नीचे पहचने लगी। वहीं लाकडाउन ने इस पूजा में भी अपना असर दिखाया जिसके चलते अधिकतर महिलाओं ने वट वृक्ष की डंगाल मंगाकर घर में ही सारी औपचारिकताएं पूरी कर वृत सम्मन किया।

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