माधौगढ-कोतवाली में स्टॉफ की कमी होने के कारण कोरोना की जंग में पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उपनिरीक्षक और सिपाहियों के जाने के बाद कोतवाली सूनी-सूनी सी है और कोरोना के महासंकट में काम ज़्यादा। फिर भी कोतवाल सुनील यादव अपने एक हमराही विकास के साथ ही व्यवस्थाएं सम्हालने में जुटे रहते हैं। कोरोना काल में सबसे ज़्यादा बोझ अगर किसी के ऊपर आया है तो वह पुलिस,सुरक्षा हो राशन,परेशानी हो बीमारी सभी में पुलिस ने बढ़कर हाथ बढ़ाया है। चुनौतियों को स्वीकार कर पुलिस ने समाज में अपनी खोती विश्वसनीयता को फिर से पुनर्जीवित कर दिया है। सुबह से बाज़ार में सोशल डिस्टेंसिंग,दोपहर में बैंक चैकिंग शाम को गस्त करना और रात को प्रवासियों की चिंता करना पुलिस की फिलहाल आम दिनचर्या हो गयी है। ऐसे में कोतवाल सुनील यादव लगातार काम कर समाज को बेहतर कानून व्यवस्था देने के काम में लगे हुए हैं। बंगरा बॉर्डर से लेकर महाराजपुरा की सीमा तक चिंता करना मुश्किल होता है,क्योंकि ज़्यादातर प्रवासी चुपके से खेतों के रास्ते गांवों में पहुंच जाते हैं,जिनसे ग्रामीणों को संक्रमण का भय है। ऐसे लोगों को गांवों से निकालकर मेडिकल चेकअप कराना भी बड़ा टेड़ा होता है। मंगलवार को ही कई गांवों के लोगों की थर्मल स्क्रीनिग कराने के बाद उन्हें गांव में क्वारंटाइन कराया गया।

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