ईको फ्रेंडली राखियां बनाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश


माधौगढ़- रक्षा बंधन के मौके पर बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज जाता है। बाजार में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक से बनी राखियों का कारोबार हर साल होता है। लेकिन इस बार इन आर्टिफिशियल राखियों को टक्कर देने के लिए नगर की छात्रा दीक्षा तरसौलिया ने ईको फ्रेंडली राखियां बना डाली। हालांकि इन राखियों को बिक्री करने का इरादा नहीं है,सिर्फ़ लोगों को बाज़ार से प्लास्टिक और मोती लगी राखियां न खरीदने का संदेश भर है,जिससे पर्यावरण का संरक्षण किया जा सके। इसके अलावा राखियों पर कोरोना से बचाव के लिए घर पर रहें,सुरक्षित रहें, का भी संदेश दे रही हैं।
घर पर साप्ताहिक लॉकडाउन के समय में छात्रा दीक्षा तरसौलिया ने ईको फ्रेंडली राखियां बनाने के विचार को धरातल पर उकेर दिया। हाथों के हुनर से बनाई गईं
इन राखियों के डिजाइन न सिर्फ आपके मन को भायेंगीं बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी सुरक्षित हैं। दीक्षा का कहना है कि प्लास्टिक का बहिष्कार करने के उद्देश्य से मन में ईको फ्रेंडली राखी बनाने का विचार आया तो फ़टाफ़ट कागज़ के पुट्ठे से राखियां तैयार कर दी। डिजायन और कलाकृति ख़ुद अपने हाथों से संजा कर उसे आकर्षक बनाया। हालांकि उन्होंने यह प्रयोग किया था लेकिन जिसने भी देखा तो हौंसला बढ़ाया। लोग खरीदने उद्देश्य से उनके पास ऑफ़र कर रहे हैं लेकिन डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है। दीक्षा कहती हैं कि उन्हें पता होता कि उनकी बनाई गई ईको फ्रेंडली राखी की डिमांड इस तरह बढ़ सकती है तो वह उसे मार्किट के लिहाज़ से बनाती,फ़िलहाल परिचित लोगों को ही राखियां कम कीमत पर उपलब्ध कराने की बात कह रही हैं।

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