उरई। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में लाल किले पर तिरंगे के समानान्तर पीला झण्डा फहराने वाले भाजपा के समर्थक युवक की गिरफ्तारी देश भर में चर्चा का विषय बनी हुयी है। वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता गजेन्द्रपाल सिंह इसे लेकर उन दिनों की याद करते है जब वे छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के 1975 में जालौन जिले में अध्यक्ष थे और लोक नायक जयप्रकाश नारायण के आवाहन पर दिल्ली में मार्च करने गये थे। उनका कहना है कि उस समय जो हुआ उसकी तुलना आज के समय की घटना से की जा सकती है।
गजेन्द्रपाल सिंह के अनुसार उन्हें निर्देश थे कि पैदल मार्च करते हुये दरिया गंज तक पहुंचे और घूम कर अरूणा आसिफ अली रोड से वापस रामलीला मैदान में आ जाये। इसी बीच संघ के स्वयं सेवक राजेन्द्र अग्निहोत्री, भानुप्रताप वर्मा, सन्तराम सिंह , रविन्द्र शुक्ला, केशव सिंह आदि भी उनके साथ शामिल हो गये । यह लोग दरिया गंज से वापिस लौटने के बजाय आगे लाल किले की ओर बढने के लिये जोर डाल रहे थे हालांकि यह बात उन्होने नहीं मानी ।
गजेन्द्रपाल सिंह का कहना है कि देश में एक राजनीतिक वर्ग ऐसा है जो षडयंत्रकारी मनोवृत्ति में लिपटा हुआ है। यह वर्ग इसके तहत हर आंदोलन में ऐसी शरारतें करता है जिससे हिंसा और उपद्रव हो सके। इस कारण उनकी उपस्थिति पर गफलत से बचने की बहुत जरूरत है।





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