लखनऊ। विधान परिषद के सभापति को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में तू डाल- डाल मै पात-पात का खेल चल रहा है। समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्यों ने शनिवार को राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल से भेंट कर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्ति करने की मांग की थी । अगले ही दिन आज राज्यपाल ने पूर्व सभापति और भाजपा के एमएलसी मानवेन्द्र सिंह को सदन का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर दिया जबकि सपा के अहमद हसन उनसे वरिष्ठ है।
विधान परिषद के निवर्तमान स्पीकर रमेश यादव को कार्यकाल समाप्त होने के उपरांत समाजवादी पार्टी ने फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया था। विधान परिषद में समाजवादी पार्टी अभी भी सबसे बडा दल है। इसको ध्यान में रखकर समाजवादी पार्टी ने उम्र के कारण अशक्त हो जाने के बाबजूद अहमद हसन को फिर भी विधान परिषद में पहुचने का अवसर दिया ताकि उनकी उम्र के हवाले से स्पीकर का पद फिर से हासिल करने में सुविधा हो सके। पर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी मानवेन्द्र सिंह को प्रोटेम स्पीकर बनने के बाद सभापति के विधिवत चुनाव का अवसर तब तक नहीं आने देगी जब तक कि सदन में उसका बहुमत न हो जाये।
भारतीय जनता पार्टी पहले दिनेश शर्मा को उप मुख्यमंत्री पद से हटाकर विधान परिषद का सभापति बनवाने की योजना पर अमल कर रही थी लेकिन सदन में अपने सदस्यांे की संख्या कम होने की वजह से उसे बेकफुट पर जाना पडा और इसीलिये मानवेन्द्र सिंह को ऐन समय पर विधान परिषद के चुनाव का पर्चा भरवा दिया गया ।
मानवेन्द्र सिंह विधान परिषद के पहले भी सभापति रह चुके है। इसके बाद उन्होने इसी सदन में उप सभापति का पद सुशोभित किया।
पहले भाजपा यज्ञदत्त शर्मा को विधान परिषद का सभापति बनाने की गोटियां फिट कर रही थी। लेकिन पार्टी के अति आत्म विश्वास के कारण स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में उन्हें अप्रत्याशित रूप से पराजय का मुह देखना पडा जिससे भाजपा की चाल नाकाम हो गयी ।
यज्ञदत्त शर्मा के लिये इसी वजह से पार्टी द्वारा निर्धारित किया उम्र का मानक तोड दिया गया था जिससे कई लोग नाराज थे । समझा जाता है कि उनकी हार में ऐसे ही असंतुष्टों के भितरघात की भूमिका रही है जिसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभी तक नाराज है।
मानवेन्द्र सिंह के प्रोटेम स्पीकर बन जाने के बाद उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का भविष्य क्या होगा इसे लेकर अटकले जारी है। यह चर्चाये तेज है कि गुजरात काडर के आइएएस रहे अरविन्द शर्मा अब उप मुख्यमंत्री बनाये जायेगें जिसके लिये विधान परिषद के हालिया चुनाव से उनकी राजनीति में इन्ट्री हो चुकी है। जाहिर है कि मंत्रिमण्डल में दो शर्मा एक साथ उप मुख्यमंत्री नहीं रह सकते है।





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