Success Story Of IAS Topper Chirag Jain: इंजीनियर चिराग जैन ने साल 2018 में अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सीएसई परीक्षा क्लियर की. इसके पहले उन्होंने 2016 में पहला अटेम्प्ट दिया था जिसमें वे प्री परीक्षा पास नहीं कर पाए थे. 2017 के दूसरे अटेम्प्ट में वे इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे लेकिन सूची में स्थान नहीं बना पाए. अंततः साल 2018 में अपने तीसरे प्रयास में चिराग ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा क्लियर की. इसके साथ ही चिराग इंडियन फॉरेस्ट सर्विस एग्जाम भी दे रहे थे और दो सालों तक उनका यहां भी सेलेक्शन हुआ. यही नहीं इस सर्विस में उनकी रैंक और भी अच्छी थी. साल 2017 और 2018 में चिराग के मैथ्स में हाईऐस्ट मार्क्स थे. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में चिराग ने मैथ्स की तैयारी के विषय में विस्तार से बात की.

आप यहां चिराग जैन द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया इंटरव्यू भी देख सकते हैं –

हेवी इंडस्ट्री लगाने जैसा है मैथ्स ऑप्शनल –

मैथ्स ऑप्शनल के बारे में बात करते हुए चिराग कहते हैं कि यह विषय किसी इंडस्ट्री के लगाने के जैसा है जहां आपको शुरू में बहुत मेहनत करनी पड़ती है और तमाम तरह की परेशानियां आती हैं. लेकिन एक बार इंडस्ट्री लग जाने के बाद जब प्रॉफिट्स आना शुरू होते हैं तो आपकी सारी मेहनत को मानो मंजिल मिल जाती है. यानी मैथ्स ऑप्शनल चुनना और उस पर कमांड हासिल करना शुरुआत में थोड़ा कठिन काम है लेकिन एक बार आप सेट हो गए तो फिर समस्या नहीं आती. उसके बाद आपको इसके बेनिफिट्स मिलना शुरू होते हैं. तो अगर आप भी शुरू में डबल मेहनत करके बाद में फल खाना चाहते हैं तो यह विषय चुनें.

टॉपर्स लेते हैं यह सब्जेक्ट –

चिराग आगे कहते हैं कि अक्सर यूपीएससी में जो कैंडिडेट्स टॉप करते हैं उनके पास मैथ्स ऑप्शनल होता है क्योंकि यह विषय बहुत ही स्कोरिंग है. एक बार फंडा क्लियर करने या कांसेप्ट समझने में देरी लग सकती है लेकिन बाद में जब सब सेट हो जाता है तो परेशानी नहीं होती.

चिराग बताते हैं कि इस विषय का सिलेबस बहुत अधिक है इसलिए इसे पहले से तैयार करें. ऑप्शनल के रूप में आपको इसे कम से कम नौ से दस महीने देने पड़ेंगे. बेहतर होगा इस बात को ध्यान में रखकर आप इसकी तैयारी पहले शुरू कर दें. चिराग यह भी सलाह देते हैं कि हो सके तो प्री के पहले 70 से 80 प्रतिशत सिलेबस पूरा कर लें और प्री के बाद मुख्यतः रिवीजन पर फोकस करें.

चिराग की सलाह –

अंत में चिराग यही कहते हैं कि सबसे पहले तो सिलेबस और पिछले साल के पेपर बहुत अच्छे से देख लें. इससे आप सही प्रश्न पिक करना सीख जाएंगे. यहां प्रश्नों में से सही क्वैश्चन चुनना भी एक बड़ा टास्क है जो आपको अभ्यास से ही आएगा. इसलिए तैयारी एक स्तर पर पहुंच जाए तो खूब मॉक टेस्ट दें. इससे आपका अभ्यास तो होगा ही साथ ही अपनी सिली मिस्टेक्स भी पता चल जाएंगी, जिन्हें बचाकर आप अधिक अंक पा सकते हैं.

चिराग आगे कहते हैं कि मैथ्स में दो ही तरह के स्कोर होते हैं या तो बहुत अच्छे या तो बहुत बुरे. इसलिए इस विषय में एक ही चीज काम करती है कि या तो आता है या नहीं आता. कहने का मतलब यह है कि अगर इस विषय में आपको कमांड न हो तो कतई यह विषय न चुनें. इसका कोई हिस्सा जीएस से भी नहीं मैच करता इसलिए जीएस की पूरी तैयारी अलग से करनी होती है. इस प्रकार इन सब बिंदुओं पर विचार करके ही यह सब्जेक्ट चुनें.

IAS Success Story: जॉब के साथ की तैयारी, आलोक ने तीसरे प्रयास में ऐसे UPSC परीक्षा में बाजी मारी

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