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भारतीय अटारी बाजार में वाहनों की मांग बढ़ी है। हालांकि नए साल की शुरुआत में ऑटो निर्माताओं ने लागत बढ़ने की बात कह वाहनों की कीमतों में इजाफा कर दिया था। लेकिन 2021-22 के लिए पेश किया गया आम बजट भारतीय वाहन बाजार के लिए खुशखबरी के बारे में आया है। वित्त मंत्री बिनमला सीतारमण ने आम बजट 2021-22 में स्टील उत्पादों पर आयात शुल्क को कम कर दिया है। यह असर यह होगा कि सभी तरह के वाहनों की कीमतों में एक से लेकर तीन प्रति तक की कमी आ सकती है। दरअसल सरकार ने आम बजट में स्टील उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को 12.5 प्रतिशत से छकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है। इसका सीधा असर पहिया वाहनों, सभी तरह के चार पहिया वाहनों कार, बस, ट्रक, ट्रैक्टर की कीमत पर होगा। सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में वाहनों की दुकानों कम हो सकती हैं। क्योंकि वाहनों के निर्माण में स्टील का मुख्य तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

ऑटो विशेषज्ञों का मानना ​​है कि वाहनों के निर्माण में 30 फीसदी से लेकर 60 फीसदी तक स्टील का इस्तेमाल होता है। नए साल की शुरुआत के साथ ही विभिन्न प्रत्यक्ष कंपनियों ने अपने वाहनों की कीमतों में वृद्धि कर दी थी। कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से उन्हें वाहनों की कीमत बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। वाहनों के उत्पादन लागत बढ़ने की सबसे मुख्य वजह स्टील के दामों का बढ़ना था।

ऐसे में जब आम बजट में स्टील पर आरंभ शुल्क शुल्क दिया गया है तो औटो निर्माताओं की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। ऐसे में जब वाहन बनाने की लागत कम होगी तो कंपनियों के ग्राहकों के लिए इनकी दुकानों में 1 प्रति से लेकर 3 प्रतिशत तक तक लग सकता है। आम बजट में बहुप्रतीक्षित वाहन कबाड़ नीति (व्हीकल किक पॉलिसी) का एलान किया। नए वाहन कबाड़ नीति के मुताबिक 15 साल पुराने वाणिज्यिक वाहनों (कमर्शियल व्हीकल) को टैक्स्ड किया जाएगा यानी उन्हें सड़कों पर चलाने की अनुमति होगी। जबकि निजी वाहन (पर्सनल व्हीकल) के लिए इस अवधि को 20 वर्ष तय किया गया है। यानी अब पुराने वाहनों को 20 साल बाद पट्टा किया जा सकेगा। अटूट फ़िट सेंटर बनाए रखने जहां इन वाहनों को ले जाना होगा। निजी वाहनों को 20 साल बाद और कम वाहनों को 15 साल बाद इन उपयुक्त फिट सेंटर पर ले जाना होगा। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए), फेडरेशन ऑफ अटैचमेंट डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने नई वाहन कबाड़ नीति को पेश किए जाने पर स्वागत किया है। फाडा का अनुमान है कि अगर 1990 को आधार माना जाए तो लगभग 37 लाख वाणिज्यिक वाहन (कमर्शियल व्हीकल) और लगभग 52 लाख यात्री वाहन (पैसेंजर व्हीकल) नए वाहन कबाड़ नीति के दायरे में आ जाएंगे।

फाडा का कहना है, “एक अनुमान के आधार पर 10 प्रति वाणिज्यिक वाहन और 5 प्रति यात्री वाहन फिर भी सड़कों पर चलते रह सकते हैं। हम अभी तक सभी तरह के सकारात्मकताओं को ठीक से देखने और समझने की जरूरत है। कुल मिलाकर इससे संलग्न की। खुदरा बिक्री पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ” आम बजट में TN, केरल, पश्चिम बंगाल और असम में प्रस्तावित 6,575 किलोमीटर के नए हाईवे निर्माण की घोषणा की गई है। इसके अलावा 19,500 किलोमीटर के भारत माला परियोजना का काम निश्चित रूप से वाणिज्यिक वाहनों खासकर मध्यम और हैवी कमर्शियल व्हीकल (एचसीवी) सेगमेंट की बिक्री को तेजी से बढ़ाएगा। बता दें कि बीते दो सालों के दौरान कमर्शियल वाहनों की बिक्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। फाडा का कहना है कि, “इस्पात उत्पादों पर सीमा शुल्क में सरकार द्वारा 7.5 प्रतिशत की कटौती करने से औटो ओईएम (ओरिजिनल इक्वपेंट मैन्युफैक्चरर्स) (ओईएम) को फायदा होगा। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि यह लाभ बढ़ाने तक भी पहुंचेंगे, जिससे मांग हो को बढ़ाने में मदद मिलेगी। ”

सार

फाडा का कहना है कि, “इस्पात उत्पादों पर सीमा शुल्क में सरकार द्वारा 7.5 प्रतिशत की कटौती करने से औटो ओईएम (ओरिजिनल इक्वपेंट मैन्युफैक्चरर्स) (ओईएम) को फायदा होगा। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि यह लाभ बढ़ाने तक भी पहुंचेंगे, जिससे मांग हो को बढ़ाने में मदद मिलेगी। ”

विस्तार

भारतीय अटारी बाजार में वाहनों की मांग बढ़ी है। हालांकि नए साल की शुरुआत में ऑटो निर्माताओं ने लागत बढ़ने की बात कह वाहनों की कीमतों में इजाफा कर दिया था। लेकिन 2021-22 के लिए पेश किया गया आम बजट भारतीय वाहन बाजार के लिए खुशखबरी के बारे में आया है। वित्त मंत्री बिनमला सीतारमण ने आम बजट 2021-22 में स्टील उत्पादों पर आयात शुल्क को कम कर दिया है। यह असर यह होगा कि सभी तरह के वाहनों की कीमतों में एक से लेकर तीन प्रति तक की कमी आ सकती है।


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