नई दिल्ली: पैंगोंग-त्सो इलाके में पहले चरण का डिसइंगेजमेंट, एलएसी के दूसरे इलाकों में विवाद खत्म करने का एक अच्छा आधार है. ये भारत और चीन का मानना है. दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की दसवें दौर की मीटिंग के बाद रविवार को भारत और चीन ने साझा बयान जारी कर ये बात कही.

भारत और चीन दोनों के ही रक्षा मंत्रालयों ने रविवार को साझा-बयान जारी कर कहा कि 20 फरवरी (शनिवार) को कोर कमांडर स्तर की 10वें दौर की बैठक चीन के मोल्डो (चुशूल) बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने पैंगोंग-त्सो झील इलाके में फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों के डिसइंगेजमेंट को पूरा करना एक ‘महत्वूपर्ण कदम’ माना है.

साझा बयान में कहा गया, “इस सकारात्मक कदम से पश्चिमी सेक्टर (भारत के उत्तरी इलाका) में एलएसी के अन्य (विवादित) मुद्दों के समाधान के लिए एक अच्छा आधार बना है.” साथ ही कहा गया कि मीटिंग में इन ‘मुद्दों पर स्पष्ट और गहन विचारों का आदान-प्रदान हुआ.’

बता दें कि शनिवार को दसवें दौर की बैठक में दूसरे चरण के डिसइंगेजमेंट पर लंबी बातचीत हुई‌ थी. ये मीटिंग एलएसी के मोल्डो गैरिसन में चीन की तरफ हुई थी. मीटिंग शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुई थी और देर रात 2 बजे खत्म हुई थी.

मीटिंग में दोनों देशों के कोर कमांडर्स ने पहले चरण के डिसइंगेजमेंट पर संतोष जताया था. बैठक में दूसरे चरण के लिए पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी के डेपसांग प्लेन, गोगरा और हॉट स्प्रिंग में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटना पर बातचीत हुई थी.

इस बैठक में भारतीय सेना की लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने हिस्सा लिया, जबकि चीन की तरफ से पीएलए आर्मी के दक्षिणी शिंचियांग के मिलिट्री डिस्ट्रिक के कमांडर अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल हुए.

सूत्रों की मानें तो गोगरा और हॉट स्प्रिंग पर तो बात बन सकती है, लेकिन डेपसांग प्लेन पर मामला अटक सकता है‌. क्योंकि डेपसांग प्लेन का विवाद काफी पुराना है और वर्ष 2002 से लंबित है.

रविवार को जारी साझा बयान में कहा गया कि “दोनों देश अपने-अपने नेताओं के महत्वपूर्ण बयानों का पालन करने, संचार और संवाद जारी रखने और बॉर्डर पर स्थिति को स्थिर और नियंत्रित करने और क्रमबद्ध तरीके से विवादित मुद्दों के पारस्परिक रूप से समाधान निकाल सकें, ताकि बॉर्डर पर शांति बनाए रखी जाए.”

सूत्रों की मानें तो दोनों देशों के कोर कमांडर्स ने पहले चरण के डिसइंगेजमेंट पर तो संतोष जताया, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच इस सेक्टर में भी डि-एसक्लेशन नहीं हुआ है. यानि डिसइंगेजमेंट के तहत सेनाएं पीछे तो हट गई हैं, लेकिन सैनिकों, टैंक, तोप, मिसाइल और दूसरे सैन्य साजो सामान में कमी नहीं आई है.

पहले चरण में पैंगोंग-त्सो लेक के उत्तर और दक्षिण में डिसइंगेजमेंट पूरा हो चुका है. पहले चरण के डिसइंगेजमेंट में पैंगोंग त्सो के उत्तर में फिंगर एरिया में दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गई हैं. चीनी सेना ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरी इलाका खाली कर दिया है और अब सिरिजैप पोस्ट पर चली गई है. एलएसी के सबसे विवादित इलाके, फिंगर एरिया से चीनी सेना ने अपने सैनिकों और बंकर्स के साथ साथ मिसाइल बेस और तोपखाने को भी हटा लिया है.

डिसइंगेजमेंट समझौते के तहत चीनी सेना को फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरा इलाका खाली करना था, और जितना भी डिफेंस-फोर्टिफिकेशन पिछले नौ महीने में किया था, वो सब तोड़ना था. भारतीय सेना भी फिंगर 4 से फिंगर 3 पर अपनी स्थायी चौकी, थनसिंह थापा पोस्ट पर चली गई है.

चीनी सेना ने पैंगोंग-त्सो के दक्षिण छोर से भी कैलाश हिल रेंज को खाली कर रही है. पैंगोंग-त्सो के दक्षिणी छोर से लेकर रेचिन ला दर्रे तक करीब 60 किलोमीटर के सभी इलाकों को दोनों देशों की सेनाओं को खाली करना है. क्योंकि यहां पर दोनों देशों की सेनाओं की एक दूसरे से मात्र 40-50 मीटर की दूरी थी. यहां पर दोनों देशों की आर्मर्ड और मैकेनाइज्ड फोर्सेज़ यानि टैंक, आईसीवी व्हीकल्स (बीएमपी इत्यादि) और हैवी-मशीनरी तैनात थी.

चीनी सेना के टैंक और दूसरे आर्मर्ड व्हीक्लस मोल्डो गैरिसन से कुछ दूरी पर रोहटगो बेस चले गए हैं, तो भारतीय सेना के टैंक, चुशुल ब्रिगेड हेडक्वार्टर और करीब ही लोमा और नियोमा तक पीछे हट गए हैं.

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