Success Story Of IAS Topper Akshat Jain: अक्षत जैन का अंक दो के साथ कुछ खास कनेक्शन है. साल 2017 में जब उन्होंने पहली बार प्री परीक्षा दी थी उस समय उनका सेलेक्शन दो अंकों से नहीं हुआ था. इसके बाद साल 2018 में अपने दूसरे प्रयास में अक्षत ने ऑल इंडिया रैंक टू पाई. इस साल परीक्षा देते समय अक्षत को इस बात का अंदाजा था कि चयन हो जाएगा लेकिन ऑल इंडिया रैंक टू आएगी यह उन्होंने नहीं सोचा था. इसके पहले की अपनी स्टूडेंट लाइफ में भी अक्षत ने बहुत संघर्ष देखें लेकिन हार नहीं मानी. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में अक्षत ने विभिन्न मुद्दों पर बात की.

आईआईटी पासआउट हैं अक्षत –

अक्षत जैन यूपीएससी के क्षेत्र में आने के पहले आईआईटी गुवाहटी से डिजाइन में ग्रेजुएशन कर चुके हैं. उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ था साल 2017 में और इसी साल मात्र तीन महीने की तैयारी में उन्होंने पहली बार यूपीएससी परीक्षा का प्री दिया था. काफी प्रयास के बावजूद अक्षत दो अंकों से एग्जाम क्लियर नहीं कर पाए. इस फेलियर से निराश होने के बजाय अक्षत ने अपनी कमियों पर काम किया और पूरे एक साल की डेडिकेटेड प्रिपरेशन के बाद साल 2018 में दूसरा अटेम्प्ट दिया. इस साल अक्षत न केवल सेलेक्ट हुए बल्कि उन्होंने ऑल इंडिया रैंक दो भी पाई. अक्षत को खुद विश्वास नहीं था कि वे इस रैंक के साथ सफल होंगे.

यहां देखें अक्षत जैन द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया इंटरव्यू – 


 

बेसिक्स से करें शुरुआत –

अक्षत अपनी तैयारी के विषय में बात करते हुए कहते हैं कि सबसे पहले तो एग्जाम का सिलेबस ठीक से देखें. वे कहते हैं कि अक्सर स्टूडेंट्स शिकायत करते हैं कि यूपीएससी का सिलेबस अनंत है लेकिन वे ऐसा नहीं मानते. उनके अनुसार यूपीएससी ने बहुत अच्छे से सिलेबस को डिफाइन किया है. अक्षत ने पहले ठीक से सिलेबस देखा और फिर उसमें दी एक-एक चीज तैयारी की.

सबसे पहले उन्होंने शॉर्ट नोट्स बनाएं जो अंत में उनके बहुत काम आए. वे दूसरे कैंडिडेट्स को भी नोट्स बनाने की सलाह देते हैं. इसके साथ ही वे जमकर आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करते थे. अक्षत का मानना है कि इस एग्जाम में सफल होने के लिए आंसर राइटिंग का बहुत महत्व है. यही नहीं अक्षत जब किसी विषय के कुछ हिस्से को तैयार कर लेते थे तो उसका टेस्ट देकर देखते थे. इस प्रकार अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने बहुत सारे टेस्ट दिए.

सोर्स के सागर में न खोएं –

अगली सलाह अक्षत सोर्स को लेकर देते हैं. वे कहते हैं कि स्टैंडर्ड बुक्स के बारे में हर कोई जानता है उन्हीं से तैयारी करें और बहुत ज्यादा किताबों के चक्कर में न पड़ें. इसी प्रकार ऑनलाइन सोर्सेस का एक बहुत बड़ा सागर है, अगर यहां डूब गए तो निकल नहीं पाएंगे. कुछ वेबसाइट्स काफी अच्छी हैं, उनका इस्तेमाल करें लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि आप हर दूसरी साइट पढ़ने लगें. वरना पूरा समय ऐसे ही चला जाएगा.

प्री और मेन्स की तैयारी अलग-अलग न करें और दोनों को साथ तैयार करते चलें. कोशिश करें कि ऑप्शनल और जीएस प्री के लिए डेडिकेटेड तैयारी शुरू करने के पहले खत्म हो जाएं क्योंकि सबसे अधिक समय इसी में लगता है. जब एक बार इतना हो जाए तो प्री को फुल-फ्लेज्ड समय दें. अगर बात करें न्यूज पेपर की तो अक्षत कहते हैं कि एक ही न्यूज पेपर पढ़ें और इसके नोट्स बनाने के चक्कर में न पड़ें वरना तैयारी के लिए समय कम पड़ जाएगा. कोई खास विषय हो तो उसके नोट्स बना लें पर ध्यान रहे कि पेपर पढ़ने में दिन के एक से डेढ़ घंटे से अधिक का समय न जाए.

अक्षत की सलाह –

तैयारी के बाद अक्षत अगली सलाह यही देते हैं कि इस परीक्षा की तैयारी के दौरान कभी भी अपना विश्वास न डगमगाने दें. कई बार आपको लगेगा कि सिलेबस ही पूरा नहीं हो रहा, दूसरे मुझसे आगे निकल जाएंगे वगैरह-वगैरह लेकिन इन विचारों को कभी खुद पर हावी न होने दें. आप अपनी तरफ से बेस्ट करें और खुद को मोटिवेटेड रखें. जैसे अक्षत के माता-पिता दोनों सिविल सर्वेंट हैं और उन्हें अपना मोटिवेशन यहीं से मिलता था क्योंकि उनके पैरेंट्स कहते थे कि दूसरों के लिए काम करने में जो सुख है वह किसी और काम में नहीं.

जो चीजें आपके हाथ में नहीं हैं उनके बारे में बिलकुल न सोचें जैसे आपका रिजल्ट और कर्म करने पर ध्यान दें. अपना बेस्ट दें और यह मानें कि सच्चा प्रयास कभी खाली नहीं जाता. वे यह भी कहते हैं कि स्ट्रेटजी बहुत सोच-समझकर बनाएं क्योंकि यही आपको सफलता के मार्ग पर ले जाती है. एक-दो टॉपर्स के इंटरव्यू देखें या किसी से गाइडेंस लें लेकिन अपनी क्षमताओं और जरूरतों के आधार पर ही अपने लिए स्ट्रेटजी बनाएं. कभी किसी को कॉपी न करें.

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