पीड़ितों में अधिकांशत: बच्चे हैं।

पीड़ितों में अधिकांशत: बच्चे हैं।
– फोटो : amar ujala

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क्षेत्र के गौरा गांव में सोमवार रात हुई बर्थडे पार्टी का खाना खाने के बाद 70 लोग बीमार हो गए। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद इनमें से 52 को सीएचसी में भर्ती करवाया गया। इसका सिलसिला मंगलवार सुबह से देर शाम तक चला। बीमार होने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं। मामले की सूचना पर एसडीएम, सीएमओ समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही छोला-चावल का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।

गौरा गांव के सनी रावत के एक वर्षीय बेटे केसू का सोमवार को जन्मदिन था। घर पर ही छोला, चावल, सूखी सब्जी व पूड़ी बनवाकर दावत दी गई थी। रात आठ बजे केक काटने के बाद खाना परोसा गया। इसके कुछ घंटे बाद कई लोगों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए। धीरे-धीरे बीमार होने वालों की संख्या मंगलवार देर शाम तक 52 पहुंच गई।

पहले इन्हें निजी क्लीनिक भेजा गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर सभी को दो एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचाया गया। एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य, सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल व इंस्पेक्टर कुलदीप दुबे भी सीएचसी पहुंचे। एसडीएम ने भर्ती लोगों का हाल जानने के साथ अधीक्षक को जरूरत पड़ने पर मरीजों को जिला अस्पताल भेजने की बात कही। उधर, सनी रावत ने बताया कि खाना घर पर हलवाई से बनवाया गया था, सिर्फ केक बाहर से मंगवाया था।

अस्पताल में कम पड़ गए बेड 
सीएचसी में 30 मरीजों को भर्ती करने की तैयारी नहीं थी। इसके चलते बेड कम पड़ गए, जिससे पीड़ितों को महिला व डेंगू वार्ड में एडमिट करना पड़ा।  सीएमओ ने बताया कि सिविल और बलरामपुर अस्पताल में भी 10-10 बेड रिजर्व कर दिए गए हैं। सभी मरीज खतरे से बाहर हैं। क्षेत्र में ब्लीचिंग पाउडर एवं एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया है। साथ ही लोगों को क्लोरीन की गोलियां व ओआरएस पैकेट बांटे गए हैं। इलाके में अस्थायी चिकित्सा कैंप लगाकर लगातार निगरानी रखने के लिए भी कहा गया है।

सीएमओ को थामनी पड़ी ग्लूकोज की बोतल
सीएचसी अधीक्षक ने बेड की कमी होने पर दो-दो मरीजों को एक बेड पर भर्ती कर दिया। सीएमओ ने इस पर नाराजगी जताते हुए सीएचसी परिसर में बने बाल महिला के भवन में बीमारों को भर्ती कराया। मरीजों को शिफ्ट करने के दौरान सीएमओ को मरीज की ग्लूकोज की बोतल संभालनी पड़ी।

भर्ती होने वालों में संदीप 7 वर्ष, बृजेश 15 वर्ष, आर्यन 13 वर्ष, आलोक 14 वर्ष, शान 26 वर्ष, रूबी 25 वर्र्ष, ममता 28 वर्ष, सरस्वती 50 वर्ष, पलक 12 वर्ष, लकी 11 वर्ष, अमन 13 वर्ष, अमन 12 वर्ष, आकाश 12 वर्ष, रचित 8 वर्ष, विस्सू 7 वर्ष, राहुल 10 वर्ष, अमित 32 वर्ष, शिल्पा 12 वर्ष, सावित्री 19 वर्ष, तन्नू 10 वर्ष, नेहा राणा 9 वर्ष, अतुल 10 वर्ष, रवि 10 वर्ष, कुमकुम 12 वर्ष, माया 12 वर्ष, मानसी 10 वर्ष, सरिता 18 वर्ष, नीतेश 13 वर्ष, राधा 14 वर्ष, पलक 12 वर्ष समेत कुल 52 लोग हैं।

गंदा पानी भी हो सकता है वजह
गौरा गांव में इतने लोगों के बीमार पड़ने की वजह गंदा पानी भी हो सकती है। गांव के पास कई फैक्टरी हैं, जिनसे गंदा पानी निकलता रहता है। आशंका है कि यही पानी रिसकर हैंडपंप से दावत वाले घर पहुंचा हो। खाना बनाने में इसी पानी का इस्तेमाल होने से लोग बीमार हो सकते हैं। पानी की जांच होने पर असली कारण सामने आ सकता है।

गांव में भेजी डॉक्टरों की टीम
जिन लोगों ने छोला-चावल खाया, वही बीमार हुए हैं। इसका मतलब है कि इसमें खराबी रही होगी। छोला-चावल का सैंपल भेजकर जांच कराई जाएगी। गांव में डॉक्टरों की एक टीम भी भेजी गई थी।
डॉ. अशोक कुमार, सीएचसी अधीक्षक

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क्षेत्र के गौरा गांव में सोमवार रात हुई बर्थडे पार्टी का खाना खाने के बाद 70 लोग बीमार हो गए। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद इनमें से 52 को सीएचसी में भर्ती करवाया गया। इसका सिलसिला मंगलवार सुबह से देर शाम तक चला। बीमार होने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं। मामले की सूचना पर एसडीएम, सीएमओ समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही छोला-चावल का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।

गौरा गांव के सनी रावत के एक वर्षीय बेटे केसू का सोमवार को जन्मदिन था। घर पर ही छोला, चावल, सूखी सब्जी व पूड़ी बनवाकर दावत दी गई थी। रात आठ बजे केक काटने के बाद खाना परोसा गया। इसके कुछ घंटे बाद कई लोगों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए। धीरे-धीरे बीमार होने वालों की संख्या मंगलवार देर शाम तक 52 पहुंच गई।

पहले इन्हें निजी क्लीनिक भेजा गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर सभी को दो एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचाया गया। एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य, सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल व इंस्पेक्टर कुलदीप दुबे भी सीएचसी पहुंचे। एसडीएम ने भर्ती लोगों का हाल जानने के साथ अधीक्षक को जरूरत पड़ने पर मरीजों को जिला अस्पताल भेजने की बात कही। उधर, सनी रावत ने बताया कि खाना घर पर हलवाई से बनवाया गया था, सिर्फ केक बाहर से मंगवाया था।

अस्पताल में कम पड़ गए बेड 

सीएचसी में 30 मरीजों को भर्ती करने की तैयारी नहीं थी। इसके चलते बेड कम पड़ गए, जिससे पीड़ितों को महिला व डेंगू वार्ड में एडमिट करना पड़ा।  सीएमओ ने बताया कि सिविल और बलरामपुर अस्पताल में भी 10-10 बेड रिजर्व कर दिए गए हैं। सभी मरीज खतरे से बाहर हैं। क्षेत्र में ब्लीचिंग पाउडर एवं एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया है। साथ ही लोगों को क्लोरीन की गोलियां व ओआरएस पैकेट बांटे गए हैं। इलाके में अस्थायी चिकित्सा कैंप लगाकर लगातार निगरानी रखने के लिए भी कहा गया है।

सीएमओ को थामनी पड़ी ग्लूकोज की बोतल

सीएचसी अधीक्षक ने बेड की कमी होने पर दो-दो मरीजों को एक बेड पर भर्ती कर दिया। सीएमओ ने इस पर नाराजगी जताते हुए सीएचसी परिसर में बने बाल महिला के भवन में बीमारों को भर्ती कराया। मरीजों को शिफ्ट करने के दौरान सीएमओ को मरीज की ग्लूकोज की बोतल संभालनी पड़ी।

भर्ती होने वालों में संदीप 7 वर्ष, बृजेश 15 वर्ष, आर्यन 13 वर्ष, आलोक 14 वर्ष, शान 26 वर्ष, रूबी 25 वर्र्ष, ममता 28 वर्ष, सरस्वती 50 वर्ष, पलक 12 वर्ष, लकी 11 वर्ष, अमन 13 वर्ष, अमन 12 वर्ष, आकाश 12 वर्ष, रचित 8 वर्ष, विस्सू 7 वर्ष, राहुल 10 वर्ष, अमित 32 वर्ष, शिल्पा 12 वर्ष, सावित्री 19 वर्ष, तन्नू 10 वर्ष, नेहा राणा 9 वर्ष, अतुल 10 वर्ष, रवि 10 वर्ष, कुमकुम 12 वर्ष, माया 12 वर्ष, मानसी 10 वर्ष, सरिता 18 वर्ष, नीतेश 13 वर्ष, राधा 14 वर्ष, पलक 12 वर्ष समेत कुल 52 लोग हैं।

गंदा पानी भी हो सकता है वजह

गौरा गांव में इतने लोगों के बीमार पड़ने की वजह गंदा पानी भी हो सकती है। गांव के पास कई फैक्टरी हैं, जिनसे गंदा पानी निकलता रहता है। आशंका है कि यही पानी रिसकर हैंडपंप से दावत वाले घर पहुंचा हो। खाना बनाने में इसी पानी का इस्तेमाल होने से लोग बीमार हो सकते हैं। पानी की जांच होने पर असली कारण सामने आ सकता है।

गांव में भेजी डॉक्टरों की टीम

जिन लोगों ने छोला-चावल खाया, वही बीमार हुए हैं। इसका मतलब है कि इसमें खराबी रही होगी। छोला-चावल का सैंपल भेजकर जांच कराई जाएगी। गांव में डॉक्टरों की एक टीम भी भेजी गई थी।

डॉ. अशोक कुमार, सीएचसी अधीक्षक





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