स्‍वतंत्रदेव सिंह बनेंगे प्रदेश अध्‍यक्ष, डा. पांडेय किए जाएंगे किनारे!

लखनऊ : वर्तमान अध्‍यक्ष की कार्यशैली से खुश नहीं है पार्टी आलाकमान : चुनाव से पहले पिछड़ों को साथ लाने की कवायद : लखनऊ : यूपी में सपा-बसपा गठबंधन से टक्‍कर लेने के लिए भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश अध्‍यक्ष के पद पर किसी पिछड़े चेहरे पर दांव खेल सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी भाजपा दलितों के साथ गैर-यादव पिछड़े पर दांव खेलने की तैयारी कर रही है। भाजपा रणनीतिकार मानते हैं कि सरकार में महत्‍वपूर्ण पदों पर सवर्णों की नियुक्ति के बाद पिछड़ों में नाराजगी है, जिसका नुकसान लोकसभा चुनाव में हो सकता है।

बताया जा रहा है कि भाजपा हाईकमान डा. महेंद्रनाथ पांडेय के रवैये से भी नाखुश है। उनकी जगह ऐसे चेहरे को लाए जाने की तैयारी चल रही है, जिसके पास संगठन का पर्याप्‍त अनुभव हो। शुरुआती चर्चा में बताया जा रहा है कि डा. महेंद्रनाथ पांडेय को हटाकर स्‍वतंत्र प्रभार वाले परिवहन राज्‍य मंत्री स्‍वतंत्रदेव सिंह को यह जिम्‍मेदारी सौंपी जा सकती है। स्‍वतंत्रदेव युवा होने के साथ ही यूपी में जनाधार रखने वाले पटेल यानी कुर्मी वर्ग से आते हैं।

डा. पांडेय के बारे में कहा जा रहा है कि इनकी उम्र और शारीरिक हालातों को देखते हुए किसी राज्‍य का राज्‍यपाल बनाया जा सकता है। वैसे भी, भाजपा हाईकमान डा. महेंद्रनाथ पांडेय के परफारमेंस से खुश नहीं है। कार्यकर्ताओं से दुराव होने के साथ डा. पांडेय के नेतृत्‍व में भाजपा तीन लोकसभा सीट एवं एक विधानसभा सीट पर हुआ उपचुनाव हार चुकी है। वर्तमान प्रदेश अध्‍यक्ष की उम्र को देखते हुए उन्‍हें कहीं और समायोजित किया जा सकता है।

चंदौली से सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय के बारे में फीडबैक भी लिया जा चुका है। संसदीय क्षेत्र की जनता भी डा. पांडेय से बहुत खुश नहीं है। पार्टी के संगठनात्‍मक कार्यों में टाइम देने की बजाय डा. पांडेय का ज्‍यादातर टाइम पूजापाठ में खर्च होता है। कार्यकर्ताओं से मुलाकात और भी मुश्किल है। इसका परिणाम यह है कि डा. पांडेय को जमीनी स्‍तर पर क्‍या हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ रहा है।

अब भाजपा लुंजपुंज अध्‍यक्ष की बजाय ऐसे तेजतर्रार अध्‍यक्ष की नियुक्ति करने की तैयारी कर रही है, जिससे समीकरण भी साधा जा सके और संगठन को मजबूती भी प्रदान की जा सके। बताया जा रहा है कि राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह स्‍वतंत्रदेव सिंह को चुनाव से पहले अध्‍यक्ष बनाने की तैयारी कर चुके हैं। श्री सिंह अमित शाह के निर्देशन में अपनी क्षमता दिखा चुके हैं।

स्वतंत्र देव सिंह पिछड़े वर्ग के नेता हैं साथ ही भाजपा के जातिगत समीकरण में भी एकदम फिट बैठते हैं। इसके पहले भाजपा प्रदेश प्रभारी के रूप में भी पिछड़ा चेहरा लाने की तैयारी कर चुकी है। संभावना है कि भूपेंद्र यादव को उत्‍तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर यादवों और पिछड़ों को अपने पाले में करने का प्रयास किया जाएगा। विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने के बाद प्रदेश प्रभारी रहे ओम माथुर यूपी नहीं आए हैं। वैसे भी, भाजपा ने सरकार के ज्‍यादातर महत्‍वपूर्ण पदों पर अगड़ों को बैठा रखा है। पिछड़ों में इसको लेकर नाराजगी भी है।

भाजपा में सरकार बनने के बाद से ही अगड़े-पिछड़े का शीतयुद्ध चल रहा है। इसे देखते हुए ही भाजपा चुनाव से पहले प्रदेश अध्‍यक्ष पद पर पिछड़ा चेहरा लाने की तैयारी कर रही है। स्‍वतंत्रदेव को इसके पहले भी समीकरण के लिहाज से बिना एमएलए और एमएलसी हुए स्‍वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाया गया था। स्‍वतंत्रदेव को संगठन का भी लंबा अनुभव है। वह भाजपा में लंबे समय से संगठनात्‍मक जिम्‍मेदारी निभाते चले आ रहे हैं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीति शुरू करने वाले स्‍वतंत्र देव सिंह युवा मोर्चा के जिला स्‍तरीय पदों से लेकर भाजयुमो के अध्‍यक्ष तक रह चुके हैं। 2004 में एमएलसी बनने वाले श्री सिंह कई बार प्रदेश महामंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा वर्ष 2010 में वह प्रदेश भाजपा में उपाध्‍यक्ष भी रह चुके हैं। लंबे समय तक संगठन में रहने वाले स्‍वतंत्र देव की पकड़ कार्यकर्ताओं पर भी मजबूत है। भाजपा आलाकमान इसी का लाभ लेकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश करेगा।

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