ख़बर सुनें

औरैया। लखनऊ से आई कवयित्री गीता चतुर्वेदी ने आजादी आसान नहीं होती यारों, इसका ऊंचा मोल चुकाना पड़ता है, बहरों को एक शोर सुनाना पड़ता है…गाया तो चौधरी विशंभर इंटर कालेज का मैदान देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एक शाम शहीदों के नाम से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति की रचनाएं प्रस्तुत कीं।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ जिलाधिकारी पीसी श्रीवास्तव ने दीप जलाकर किया। ओज कवि गोपाल पांडेय ने राजनीति मानचित्र बदलना चाहती थी, राष्ट्रहित में पिस्टल की गोली आई काम तो संचालन कर रहे कवि अजय अंजाम ने मेवाड़ विजय के रास्ते में खुद का तन रोड़ा बना दिया…चेतक योद्धा बन गया और मुगलों को घोड़ा बना दिया पेश की।
फिर डॉ. गोविंद द्विवेदी ने राष्ट्रद्रोह के विरुद्ध शंखनाद कर फिर से जवानी लांच कीजिए…कवि भालचंद त्रिपाठी ने इन अश्कों में जो गुम है वो खजाना ढूंढ लेने दो..मै आवारा सही मुझको ठिकाना ढूंढ लेने दो…सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि अमर नाथ दीक्षित ने तुम्हारी मखमली यादें सदा मुझको सतातीं हैं सुनाईं।
अंत में कवि कमलेश शर्मा व बलराम श्रीवास्तव ने अपनी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान डीएम ने कवियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को सम्मानित किया। कवि सम्मेलन के दौरान सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एडीएम न्यायिक अब्दुल वासित, एडीएम रेखा एस. चौहान, एसडीएम मनोज कुमार सिंह, विद्यालय प्रबंधक सौरभ भूषण शर्मा आदि रहे।

औरैया। लखनऊ से आई कवयित्री गीता चतुर्वेदी ने आजादी आसान नहीं होती यारों, इसका ऊंचा मोल चुकाना पड़ता है, बहरों को एक शोर सुनाना पड़ता है…गाया तो चौधरी विशंभर इंटर कालेज का मैदान देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एक शाम शहीदों के नाम से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति की रचनाएं प्रस्तुत कीं।

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ जिलाधिकारी पीसी श्रीवास्तव ने दीप जलाकर किया। ओज कवि गोपाल पांडेय ने राजनीति मानचित्र बदलना चाहती थी, राष्ट्रहित में पिस्टल की गोली आई काम तो संचालन कर रहे कवि अजय अंजाम ने मेवाड़ विजय के रास्ते में खुद का तन रोड़ा बना दिया…चेतक योद्धा बन गया और मुगलों को घोड़ा बना दिया पेश की।

फिर डॉ. गोविंद द्विवेदी ने राष्ट्रद्रोह के विरुद्ध शंखनाद कर फिर से जवानी लांच कीजिए…कवि भालचंद त्रिपाठी ने इन अश्कों में जो गुम है वो खजाना ढूंढ लेने दो..मै आवारा सही मुझको ठिकाना ढूंढ लेने दो…सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि अमर नाथ दीक्षित ने तुम्हारी मखमली यादें सदा मुझको सतातीं हैं सुनाईं।

अंत में कवि कमलेश शर्मा व बलराम श्रीवास्तव ने अपनी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान डीएम ने कवियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को सम्मानित किया। कवि सम्मेलन के दौरान सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एडीएम न्यायिक अब्दुल वासित, एडीएम रेखा एस. चौहान, एसडीएम मनोज कुमार सिंह, विद्यालय प्रबंधक सौरभ भूषण शर्मा आदि रहे।



Source link

0Shares

ताज़ा ख़बरें

%d bloggers like this: