जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की खाली कुर्सी।

जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की खाली कुर्सी।
– फोटो : BANDA

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बांदा। जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की जा रही हैं। छुट्टियों के बाद शुक्रवार को पूरे समय खुली ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन कई डॉक्टरों की कुर्सियां खाली रहीं। मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। पर्चा लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों से पूछने पर दलील थी कि साहब राउंड पर हैं।
जिला अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है। इस अवधि में शुक्रवार को लगभग 1243 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। कुछेक डॉक्टरों को छोड़कर ज्यादातर की कुर्सियां खाली रहीं। सुबह नौ बजे तक फिजीशियन नहीं आए थे।
उनके कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी लाइन रही। 10:30 बजे तक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता और फिजीशियन डॉ. हृदयेश पटेल की कुुर्सी खाली रही। इनके कक्ष के गेट पर बैठा स्वास्थ्य कर्मी सिर्फ पर्चा लगाता रहा। पूछने पर बताया कि डॉक्टर साहब राउंड पर हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने गए हैं।
डॉ. हृदयेश पटेल का कहना है कि ओपीडी में पहुंचने से पहले वार्डों में भर्ती मरीजों को देखना जरूरी होता है। कुछ गंभीर मरीज भी भर्ती हैं। पहले राउंड लेने गए थे। इसीलिए ओपीडी में बैठने में देरी हुई। डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड में कुछ गंभीर बच्चे भर्ती हैं। डिप्थीरिया से ग्रसित बच्चे भी हैं। उन्हें देखना और इलाज की जानकारी लेना बहुत जरूरी था। ओपीडी में आने से पहले राउंड लेते हैं।
मरीजों की भीड़ के चलते मौजूद डॉक्टर भी इलाज के नाम पर रस्म अदा करते रहे। नब्ज टटोलने की बजाय सिर्फ हाल पूछते और दवा लिखकर चलता कर देते रहे। यह आलम लगभग सभी डॉक्टरों का रहा।
जिला अस्पताल में ईएनटी व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशान दीक्षित व डॉ. मुकेश कुमार, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसडी त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर गुप्ता व डॉ. शाहिद, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकासदीप व सर्जन डॉ. रामेंद्र कुमार मरीजों का इलाज करते रहे। सभी के यहां मरीजों की लंबी लाइन थी। दो मिनट में एक मरीज को निपटाते रहे। मरीज से हाल पूछते और एक रुपये के पर्चे में पांच दिन की दवा लिखकर चलता करते रहे।
सभी चिकित्सकों को सख्त निर्देश हैं कि ओपीडी के समय पर कक्ष में उपस्थित हो जाएं। हालांकि डॉक्टरों का वार्डों में राउंड लेना भी जरूरी है। ओपीडी में आने से पहले डॉक्टर वार्डों और ट्रामा सेंटर का राउंड करते हैं। इसलिए अक्सर देर हो जाती है। फिर भी 9 से 9:30 बजे तक ओपीडी में बैठ जाना चाहिए। नदारद डॉक्टरों से जवाब मांगेंगे। -डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा।

बांदा। जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की जा रही हैं। छुट्टियों के बाद शुक्रवार को पूरे समय खुली ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन कई डॉक्टरों की कुर्सियां खाली रहीं। मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। पर्चा लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों से पूछने पर दलील थी कि साहब राउंड पर हैं।

जिला अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है। इस अवधि में शुक्रवार को लगभग 1243 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। कुछेक डॉक्टरों को छोड़कर ज्यादातर की कुर्सियां खाली रहीं। सुबह नौ बजे तक फिजीशियन नहीं आए थे।

उनके कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी लाइन रही। 10:30 बजे तक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता और फिजीशियन डॉ. हृदयेश पटेल की कुुर्सी खाली रही। इनके कक्ष के गेट पर बैठा स्वास्थ्य कर्मी सिर्फ पर्चा लगाता रहा। पूछने पर बताया कि डॉक्टर साहब राउंड पर हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने गए हैं।

डॉ. हृदयेश पटेल का कहना है कि ओपीडी में पहुंचने से पहले वार्डों में भर्ती मरीजों को देखना जरूरी होता है। कुछ गंभीर मरीज भी भर्ती हैं। पहले राउंड लेने गए थे। इसीलिए ओपीडी में बैठने में देरी हुई। डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड में कुछ गंभीर बच्चे भर्ती हैं। डिप्थीरिया से ग्रसित बच्चे भी हैं। उन्हें देखना और इलाज की जानकारी लेना बहुत जरूरी था। ओपीडी में आने से पहले राउंड लेते हैं।

मरीजों की भीड़ के चलते मौजूद डॉक्टर भी इलाज के नाम पर रस्म अदा करते रहे। नब्ज टटोलने की बजाय सिर्फ हाल पूछते और दवा लिखकर चलता कर देते रहे। यह आलम लगभग सभी डॉक्टरों का रहा।

जिला अस्पताल में ईएनटी व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशान दीक्षित व डॉ. मुकेश कुमार, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसडी त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर गुप्ता व डॉ. शाहिद, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकासदीप व सर्जन डॉ. रामेंद्र कुमार मरीजों का इलाज करते रहे। सभी के यहां मरीजों की लंबी लाइन थी। दो मिनट में एक मरीज को निपटाते रहे। मरीज से हाल पूछते और एक रुपये के पर्चे में पांच दिन की दवा लिखकर चलता करते रहे।

सभी चिकित्सकों को सख्त निर्देश हैं कि ओपीडी के समय पर कक्ष में उपस्थित हो जाएं। हालांकि डॉक्टरों का वार्डों में राउंड लेना भी जरूरी है। ओपीडी में आने से पहले डॉक्टर वार्डों और ट्रामा सेंटर का राउंड करते हैं। इसलिए अक्सर देर हो जाती है। फिर भी 9 से 9:30 बजे तक ओपीडी में बैठ जाना चाहिए। नदारद डॉक्टरों से जवाब मांगेंगे। -डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा।





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