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बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में 42 बेड का पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड बनेगा। शासन ने इसके लिए 50 लाख रुपये का बजट मंजूर कर दिया है। इसे एनएचएम के तहत तैयार किया जाना है। एनीस्थिसिया विभाग में जगह चयनित कर ली गई है। एक बाल रोग विशेषज्ञ पर लगभग आठ बेड की जिम्मेदारी होगी।
मेडिकल कॉलेज में संचालित पीकू वार्ड अभी सिर्फ पांच बेड का है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के मद्देनजर अस्थायी रूप से 20 बेड का पीकू वार्ड अलग तैयार किया गया था, लेकिन इनमें मशीनें नहीं थीं। अब शासन ने मेडिकल कॉलेज में 42 बेड का पीकू वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बजट भी मंजूर कर दिया है। इस वार्ड में सिर्फ पांच साल उम्र तक के बच्चे ही भर्ती किए जाएंगे।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि पीकू वार्ड के सभी बेड बच्चों वाले वेंटीलेटर से लैस होंगे। वार्मर और फोटो थेरेपी मशीनें भी होंगी। लखनऊ से बेड और मशीनें आएंगी। वार्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एनीस्थिसिया विभाग के खाली पड़े हॉल में इसे बनवाया जाएगा। नवजात बच्चों को भी इसमें भर्ती किया जाएगा। नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पीजी की मान्यता मिलने पर चार बाल रोग विशेषज्ञ इस कोर्स के लिए आ गए हैं। दो पहले से हैं।
बच्चों के खेलने के लिए होंगे खिलौने
पीकू वार्ड के सभी बेड ऑक्सीजन प्लांट से जुड़ें होंगे। यह छोटे वेंटीलेटर और वॉर्मर व फोटो थेरेपी मशीनों से लैस होगा। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौनों की भी व्यवस्था होगी। दीवारों पर कार्टून के चित्र बनाए जाएंगे, जिससे बच्चों का मन खुश रहे। बच्चे के साथ एक अभिभावक खासकर मां को रुकने की अनुमति होगी। इसके अलावा पीकू वार्ड में अन्य किसी का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में 42 बेड का पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड बनेगा। शासन ने इसके लिए 50 लाख रुपये का बजट मंजूर कर दिया है। इसे एनएचएम के तहत तैयार किया जाना है। एनीस्थिसिया विभाग में जगह चयनित कर ली गई है। एक बाल रोग विशेषज्ञ पर लगभग आठ बेड की जिम्मेदारी होगी।

मेडिकल कॉलेज में संचालित पीकू वार्ड अभी सिर्फ पांच बेड का है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के मद्देनजर अस्थायी रूप से 20 बेड का पीकू वार्ड अलग तैयार किया गया था, लेकिन इनमें मशीनें नहीं थीं। अब शासन ने मेडिकल कॉलेज में 42 बेड का पीकू वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बजट भी मंजूर कर दिया है। इस वार्ड में सिर्फ पांच साल उम्र तक के बच्चे ही भर्ती किए जाएंगे।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि पीकू वार्ड के सभी बेड बच्चों वाले वेंटीलेटर से लैस होंगे। वार्मर और फोटो थेरेपी मशीनें भी होंगी। लखनऊ से बेड और मशीनें आएंगी। वार्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एनीस्थिसिया विभाग के खाली पड़े हॉल में इसे बनवाया जाएगा। नवजात बच्चों को भी इसमें भर्ती किया जाएगा। नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पीजी की मान्यता मिलने पर चार बाल रोग विशेषज्ञ इस कोर्स के लिए आ गए हैं। दो पहले से हैं।

बच्चों के खेलने के लिए होंगे खिलौने

पीकू वार्ड के सभी बेड ऑक्सीजन प्लांट से जुड़ें होंगे। यह छोटे वेंटीलेटर और वॉर्मर व फोटो थेरेपी मशीनों से लैस होगा। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौनों की भी व्यवस्था होगी। दीवारों पर कार्टून के चित्र बनाए जाएंगे, जिससे बच्चों का मन खुश रहे। बच्चे के साथ एक अभिभावक खासकर मां को रुकने की अनुमति होगी। इसके अलावा पीकू वार्ड में अन्य किसी का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।





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