उत्तर प्रदेश जालौन राजनीति

विकास कार्यों के प्रति उदासीन भाजपा सांसद का टिकट कटना तय

0 ढाई-ढाई करोड़ की तीन किस्ते अब तक नहीं की खर्च

0 पूर्व में भी आखिरी किस्त नहीं की थी खर्च

0 गोद लिये गये गांवों में भी नहीं कराये गये विकास कार्य

उरई (जालौन)। (गोविंद सिंह दाऊ):- एक ओर जहां केंद्र व प्रदेश सरकार गांवों से लेकर शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों का बखान करते नहीं थक रही है तो वहीं भाजपा के ही सांसद भानुप्रताप वर्मा की विकास कार्यों से कोई दिलचस्पी पूरे कार्यकाल के दौरान क्षेत्रीय जनता को नहीं दिखी। ताज्जुब की बात तो यह है कि लोकसभा क्षेत्र का विकास कराने के लिये सांसद निधि से करोड़ों रुपये मिलता है उस निधि को भी सांसद वर्मा खर्चने में शत प्रतिशत कंजूसी बरतने से नहीं चूकते है। आलम यह है कि विकास कार्यों के प्रति लापरवाह सांसद ने तीन किस्तों में विकास हेतु आयी निधि जो साढ़े सात करोड़ है उसे तक खर्च नहीं किया। खास बात तो यह है कि इससे पूर्व भी वर्ष 2004 से 2009 तक जब वह सांसद थे तब भी उन्होंने अपनी आखिरी किस्त जो लगभग पौने दो करोड़ रुपये थे उसे भी खर्च नहीं किया था।
गौरतलब हो कि चुनावों के दौरान हर प्रत्याशी जनता के बीच जब पहुंचता है तो वह क्षेत्र में विकास कार्य कराने जाने का आश्वासन देता है और जनप्रतिनिधि निर्वाचित होने के बाद जनसंपर्क के दौरान जनता को दिये आश्वासन को पूरा करने का भरसक प्रयास करता है। लेकिन इसके उलट जालौन-गरौरा-भोगनीपुर क्षेत्र से भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह से उदासीन रवैया रखा। सांसद की कार्यशैली को देखकर भाजपा कार्यकर्ताओं में भी तीखी नाराजगी देखी जा रही है जो अभी से कहते सुने जा रहे हैं यदि पार्टी ने सांसद को पुनः प्रत्याशी बनाया तो उसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ेगा। सांसद भानुप्रताप वर्मा को सांसद निधि से ढाई-ढाई करोड़ की तीन किस्तें जो लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये होते हैं उसे भी खर्च करने में चुनावी वर्ष में कंजूसी करने से नहीं चूके। ताज्जुब की बात तो यह है कि इससे पूर्व भी वर्ष 2004 से 2009 के कार्यकाल में भी सांसद भानुप्रताप वर्मा ने अपनी निधि की आखिरी किस्त पौने दो करोड़ खर्च नहीं कर पाये थे। ऐसा ही हाल सांसद द्वारा गोद लिये गये गांवों का नजर आ रहा है। गोद लिये गांवों में कहां पर सांसद ने विकास कार्य कराये इसकी जानकारी गांव के ग्रामीणों तक को नहीं है। वैसे भी भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा को आम जनता में कभी कभार ही देखा जाता रहा। उन्हें न तो जनता से मेलजोल रखने की आदत है और न ही विकास कार्यों से दूर-दूर तक कोई सरोकार रहता है। यही कारण है कि पिछले दिनांे जब पार्टी के राष्ट्रीय नेता नरोत्तम मिश्रा संगठन कार्यक्रम में शामिल होने उरई आये थे तो उस दौरान भी बड़ी संख्या में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सांसद की निष्क्रियता पर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया था। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या विकास कार्योें के प्रति नकरात्मक रवैया अपनाने वाले सांसद भानुप्रताप वर्मा के स्थान पर पार्टी किसे अपना प्रत्याशी घोषित करती है इस ओर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाओं का बाजार गर्मा रहा है।

इंसेट
पांच वर्ष के कार्यकाल में मीडिया से बनाये रखी दूरी

उरई। वर्ष 2014 में सांसद निर्वाचित हुये भानुप्रताप वर्मा ने पूरे पांच वर्ष में एक बार भी मीडिया से रूबरू होने की जेहमत नहीं उठायी। जबकि अन्य जनप्रतिनिधि अनेकों अवसरों पर मीडिया से रूबरू होकर खुद के द्वारा कराये गये विकास कार्यों की पत्रकारों को जानकारी देते रहते हैं साथ ही साथ वह मीडिया से अनेकों मुद्दों पर खुलकर चर्चा भी करते हैं ताकि उन्हें जनभावनाओं की जानकारी होती रहे साथ ही विकास से उपेक्षित क्षेत्रों में विकास कार्य कराकर उसे संतृप्त कराया जा सके। लेकिन इस मामले भी सांसद भानुप्रताप वर्मा फिसड्डी साबित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *