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जायस (अमेठी)। टांडा-बांदा हाइवे पर जायस कस्बे से पश्चिम मोजमगंज के मट्टन नाले से 20 मीटर दूरी पर निर्मित अतिरिक्त पुल धंस गया है। पुल धंसने के बाद एनएचएआई ने अस्थाई बैरिकेडिंग कर कर मौन धारण कर लिया है। ऐसे में धंसा हुआ पुल व सड़क कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है।
बांदा-टांडा नेशनल हाइवे रायबरेली-सुल्तानपुर मार्ग पर जायस थाना क्षेत्र के मोजमगंज के पास मट्टन नाले के पास अतिरिक्त जल निकासी के लिए एक पुल बना है। यह पुल सोमवार रात हुई हल्की बारिश में ही एक तरफ धंस गया है। हाइवे पर पुल धंसने के साथ सड़क पर बड़ा गड्ढा हो गया है। इसकी जानकारी जब एनएचएआई के अफसरों को हुई तो उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़क के चारों तरफ अस्थाई बैरिकेडिंग कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
करीब 232 किलोमीटर लंबे इस हाइवे पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में छोटे-बड़े व भारी वाहनों का आवागमन होता है। साथ ही प्रति दिन वीवीआइपी भी गुजरते हैं। बावजूद इसके किसी की नजर क्षतिग्रस्त पुलिया पर नहीं पड़ी। ऐसे में जहां पुलिया क्षतिग्रस्त होने व सड़क पर गड्ढा होने से किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है तो हाइवे पर आवागमन के लिए टोल वसूलने के बाद पुल की मरम्मत नहीं करने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
जानकारी के बाद एनएचएआई की ओर से कोई संकेतक भी नहीं लगाया गया है। ऐसे में रात में पुल पर बड़े हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। एनएचएआई के पीडी समर सिंह ने बताया कि बैरिकेडिंग को और चुस्त करने के साथ यहां संकेतक लगाए जाएंगे, जिससे दुर्घटना नहीं हो। क्षतिग्रस्त पुल व सड़क को बरसात बाद सही कराया जा सकेगा।

जायस (अमेठी)। टांडा-बांदा हाइवे पर जायस कस्बे से पश्चिम मोजमगंज के मट्टन नाले से 20 मीटर दूरी पर निर्मित अतिरिक्त पुल धंस गया है। पुल धंसने के बाद एनएचएआई ने अस्थाई बैरिकेडिंग कर कर मौन धारण कर लिया है। ऐसे में धंसा हुआ पुल व सड़क कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है।

बांदा-टांडा नेशनल हाइवे रायबरेली-सुल्तानपुर मार्ग पर जायस थाना क्षेत्र के मोजमगंज के पास मट्टन नाले के पास अतिरिक्त जल निकासी के लिए एक पुल बना है। यह पुल सोमवार रात हुई हल्की बारिश में ही एक तरफ धंस गया है। हाइवे पर पुल धंसने के साथ सड़क पर बड़ा गड्ढा हो गया है। इसकी जानकारी जब एनएचएआई के अफसरों को हुई तो उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़क के चारों तरफ अस्थाई बैरिकेडिंग कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।

करीब 232 किलोमीटर लंबे इस हाइवे पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में छोटे-बड़े व भारी वाहनों का आवागमन होता है। साथ ही प्रति दिन वीवीआइपी भी गुजरते हैं। बावजूद इसके किसी की नजर क्षतिग्रस्त पुलिया पर नहीं पड़ी। ऐसे में जहां पुलिया क्षतिग्रस्त होने व सड़क पर गड्ढा होने से किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है तो हाइवे पर आवागमन के लिए टोल वसूलने के बाद पुल की मरम्मत नहीं करने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

जानकारी के बाद एनएचएआई की ओर से कोई संकेतक भी नहीं लगाया गया है। ऐसे में रात में पुल पर बड़े हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। एनएचएआई के पीडी समर सिंह ने बताया कि बैरिकेडिंग को और चुस्त करने के साथ यहां संकेतक लगाए जाएंगे, जिससे दुर्घटना नहीं हो। क्षतिग्रस्त पुल व सड़क को बरसात बाद सही कराया जा सकेगा।



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