डीआईजी जे. रविंद्र गौड़। (फाइल)

डीआईजी जे. रविंद्र गौड़। (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला।

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गोरखपुर में रंगदारी न देने पर अस्पताल संचालक विकास मणि त्रिपाठी से मारपीट व लूट करने के आरोपियों पर कोतवाली थाने में भी केस दर्ज कर लिया गया। डीआईजी जे रविंद्र के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई की। बुधवार को घटना वाले दिन तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था। अब पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।

जानकारी के मुताबिक, मेवातीपुर निवासी विकास मणि त्रिपाठी तारामंडल के बुद्ध विहार में डिसेंट हॉस्पिटल चलाते हैं। 25 अक्तूबर की शाम वह जिला अस्पताल में भर्ती परिचित युवक को देखने गए थे।

आरोप है कि अस्पताल संचालन के लिए रंगदारी मांग रहे आदित्य सिंह, शिवम अग्रहरि ने साथियों संग घेरकर पीट दिया और और सोने की चेन लूट ली थी। शिकायत करने पर केस दर्ज नहीं हुआ तो आरोपी रामगढ़ताल इलाके में घेरकर फिर मारपीट किए थे।

रामगढ़ताल पुलिस ने आदित्य सिंह, आर्दश सिंह, विनीत सिंह, शिवम अग्रहरि, अर्चित, मोनू निषाद और अज्ञात साथियों के खिलाफ मारपीट व बलवा करने का केस दर्ज किया था।

रंगदारी के लिए मारपीट व लूट किए जाने की घटना में कोतवाली पुलिस के कार्रवाई न करने की जानकारी होने पर डीआइजी ने बृहस्पतिवार को जिले के पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की। मुकदमा दर्ज न किए जाने का उन्होंने कारण पूछा तो हरकत में आई कोतवाली थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

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गोरखपुर में रंगदारी न देने पर अस्पताल संचालक विकास मणि त्रिपाठी से मारपीट व लूट करने के आरोपियों पर कोतवाली थाने में भी केस दर्ज कर लिया गया। डीआईजी जे रविंद्र के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई की। बुधवार को घटना वाले दिन तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था। अब पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।

जानकारी के मुताबिक, मेवातीपुर निवासी विकास मणि त्रिपाठी तारामंडल के बुद्ध विहार में डिसेंट हॉस्पिटल चलाते हैं। 25 अक्तूबर की शाम वह जिला अस्पताल में भर्ती परिचित युवक को देखने गए थे।

आरोप है कि अस्पताल संचालन के लिए रंगदारी मांग रहे आदित्य सिंह, शिवम अग्रहरि ने साथियों संग घेरकर पीट दिया और और सोने की चेन लूट ली थी। शिकायत करने पर केस दर्ज नहीं हुआ तो आरोपी रामगढ़ताल इलाके में घेरकर फिर मारपीट किए थे।

रामगढ़ताल पुलिस ने आदित्य सिंह, आर्दश सिंह, विनीत सिंह, शिवम अग्रहरि, अर्चित, मोनू निषाद और अज्ञात साथियों के खिलाफ मारपीट व बलवा करने का केस दर्ज किया था।

रंगदारी के लिए मारपीट व लूट किए जाने की घटना में कोतवाली पुलिस के कार्रवाई न करने की जानकारी होने पर डीआइजी ने बृहस्पतिवार को जिले के पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की। मुकदमा दर्ज न किए जाने का उन्होंने कारण पूछा तो हरकत में आई कोतवाली थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।





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