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मथुरा की अदालत ने वर्ष 2009 के हत्या के मामले में सैनिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सैन्यकर्मी ने अपने सैनिक दोस्त की हत्या कर दी थी। उस पर प्रत्यक्षदर्शी की हत्या का भी आरोप लगा था। 

राया क्षेत्र के गांव जोगपुरा निवासी सैन्यकर्मी हरेंद्र 24 फरवरी 2009 को अवकाश पर घर आया हुआ था। उसका दोस्त अमरपाल निवासी तिरवाया राया उसके घर आया और राधारानी के दर्शन करने को चलने के लिए कहा। सैन्यकर्मी हरेन्द्र अपने दोस्त सैनिक अमरपाल के साथ चला गया। जब वह वापस नहीं लौटा तो भाई दीपक, हरेंद्र को देखने गया तो बारहमासी प्याऊ के निकट हरेन्द्र व राहगीर बाबूलाल घायलावस्था में मिले। 

दीपक ने मांट थाने में दी तहरीर में जानकारी दी कि घायल भाई हरेन्द्र ने बताया कि उसे अमरपाल ने गोली मारी है और उसे गोली मारते हुए राहगीर बाबूलाल ने देख लिया था तो उसे भी गोली मार दी है। दोनों ने अस्पताल ले जाने के दौरान ही दम तोड़ दिया। 

सुनवाई के दौरान एडीजे-7 संजय चौधरी ने अमरपाल को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास व दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। एडीजीसी मुकेश बाबू गोस्वामी ने बताया कि अदालत ने अमरपाल को केवल हरेंद्र की हत्या का दोषी माना है। बाबूलाल की हत्या का नहीं। हरेंद्र की हत्या में आजीवन कारावास मिलने के बाद जमानत पर चल रहे अमरपाल को जेल भेज दिया।

विस्तार

मथुरा की अदालत ने वर्ष 2009 के हत्या के मामले में सैनिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सैन्यकर्मी ने अपने सैनिक दोस्त की हत्या कर दी थी। उस पर प्रत्यक्षदर्शी की हत्या का भी आरोप लगा था। 

राया क्षेत्र के गांव जोगपुरा निवासी सैन्यकर्मी हरेंद्र 24 फरवरी 2009 को अवकाश पर घर आया हुआ था। उसका दोस्त अमरपाल निवासी तिरवाया राया उसके घर आया और राधारानी के दर्शन करने को चलने के लिए कहा। सैन्यकर्मी हरेन्द्र अपने दोस्त सैनिक अमरपाल के साथ चला गया। जब वह वापस नहीं लौटा तो भाई दीपक, हरेंद्र को देखने गया तो बारहमासी प्याऊ के निकट हरेन्द्र व राहगीर बाबूलाल घायलावस्था में मिले। 

दीपक ने मांट थाने में दी तहरीर में जानकारी दी कि घायल भाई हरेन्द्र ने बताया कि उसे अमरपाल ने गोली मारी है और उसे गोली मारते हुए राहगीर बाबूलाल ने देख लिया था तो उसे भी गोली मार दी है। दोनों ने अस्पताल ले जाने के दौरान ही दम तोड़ दिया। 

सुनवाई के दौरान एडीजे-7 संजय चौधरी ने अमरपाल को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास व दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। एडीजीसी मुकेश बाबू गोस्वामी ने बताया कि अदालत ने अमरपाल को केवल हरेंद्र की हत्या का दोषी माना है। बाबूलाल की हत्या का नहीं। हरेंद्र की हत्या में आजीवन कारावास मिलने के बाद जमानत पर चल रहे अमरपाल को जेल भेज दिया।





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