उत्तर प्रदेश जालौन

सरकारी अस्पताल बना डॉक्टरो की कमाई का अड्डा

उरई (जालौन)(गोविंद सिंह दाऊ):-। । सरकार भले ही लाखों करोड़ों रुपए गरीबों को निःशुल्क सेवा में लगाती हो पर उरई के अस्पताल को देखकर ऐसा लगता नहीं जहां वादे किए जाते हैं कि सरकारी अस्पताल में निशुल्क जांच के साथ दवाई भी फ्री मिलती है पर उरई के अस्पताल ऐसे करने में कतरा रहे
उरई के जिला अस्पताल डॉक्टर कमाई का अड्डा बन गए गरीब व्यक्ति गांव से और दूर-दूर से निशुल्क स्वास्थ सेवाओं के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचता है पर उसे निःशुल्क सेवाओं की जगह ठेंगा दिखाया जाता है। डॉक्टरों ने दवाई से लेकर जांच बालों को अपने भारी कमीशन पर सेट कर रखा जो मरीज सरकारी अस्पताल में दिखाने के लिए आते हैं उन्हें सरकारी अस्पताल में सुविधा न होने का कारण बताकर बाहर से जांच और दवाईयां लिख देते हैं फिर अपने सेट किए हुए कमीशन वाले का कार्ड देकर उधर से जांचें और दवाई लेने को कहते हैं गरीब व्यक्ति मजबूरी मैं दवाइयों जांच कर आता है बस उसे लगता की शायद कुछ ही पैसे कम हो जाए इसी बात का डॉक्टर फायदा उठा रहे और गरीबों को लूट रहे अब तो गरीब व्यक्ति सरकारी अस्पताल जाने से भी कतराने लगे क्योंकि जो डॉक्टर सरकारी अस्पताल में इलाज करते हैं उन्होंने ही अपने बड़े बड़े बंगलों में निजी अस्पताल खोल रखे और मरीजों को वही बुलाते और बड़ी-बड़ी जांचो और दवाईयों के नाम पर फीस उन से वसूलते मरीज को भी मजबूरी में जाना पड़ता क्यों की वह डॉक्टर को भगवान समझने लगे लेकिन वह डॉक्टर भगवान की जगह अपनी मोटी मोटी कमाई के लिए उन मरीजों को लुट रहे यह घटना पहली बार नहीं है यह तो सदियों पुरानी रीत से चली आ रही जब मामला संगीन में आता है तो जांच के नाम पर रिश्वतखोरी और ठेंगा दिखा दिया जाता अस्पताल में पहुंचे हींगा बहादुर जोकि नेपाल के हेैं जो भारत में रह रहें हैं उन्होंने बताया कि वह कुछ दिनों से बीमार थे सोमवार को सरकारी अस्पताल में दवाई लेने आये थे लेकिन डाॅक्टरों ने उन्हें निःशुल्क दवा लिखने के वजह बाहर की दवा लिख दी जबकि वह वहुत गरीब है बाहर दवा लेने में सक्षम नहीं है विष्णु स्वरूप श्रीवास्तव ने बताया की मैं तो 3 महीने से बीमार चल रहे हूं और वह काफी गरीब है सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं लेकिन हमेशा उन्हें 2 या 3 ही दवाई अंदर की और सब दवाई बाहर की लिख दी जातीं हैं और एक मेडिकल का कार्ड और कह दिया जाता है कि इस मेडिकल से ले लेना जब इलाज कराना है तो मजबूरी में दवाई लेनी पड़ेगी
जब लाखों करोड़ों रुपए सरकार देती है तो इतना पैसा क्या प्रशासन खा जाता या फिर डॉक्टर अपनी मोटी मोटी कमाई के लिए बाहर की दवाई लिखते हैं गरीब को अपने आराम की जिन्दगी के लिये डाॅक्टर कब तक इन गरीबों को लूटते रहेंगें।

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