उत्तर प्रदेश जालौन

डीएम के कड़े रुख के चलते खनन माफियाओं हौंसले पस्त

० आधा दर्जन पट्टा धारकों ने सरेंडर अर्जी डाली

उरई (जालौन)।(गोविंद सिंह दाऊ):-। जिलाधिकारी डॉ मन्नान अख्तर के कड़े रुख के चलते अवैध खनन की गुंजायश न रह जाने से मौरम कारोबार से जुड़े कलाकारों के हौंसले पस्त नजर आ रहे हैं। आधा दर्जन पट्टेधारकों ने जिलाधिकारी के सख्त तेवरों के कारण अपनी दाल गलती न देख सरेंडर की अर्जी डाल दी है। इसके पीछे बताया यह गया है कि संबंधित पट्टा धारकों के खंडो में मौरंग ख़त्म हो गयी थी जबकि उन्होने जुगाड़ की कोशिश की तो जिलाधिकारी के तेवर उनके होश बिगाड़ने वाले साबित हुए। जिले में हाल में कार्यभार सम्हालने वाले तेजतर्रार खनन अधिकारी रंजीत निर्मल ने इसकी पुष्टि की। उनके पूर्ववर्ती खाना अधिकारी राजेश कुमार सिंह को शासन ने उनकी कारगुजारियों के चलते डीएम की रिपोर्ट में निलंबित कर दिया था। साफ़- सुथरी छवि के कारण ही खनन सेक्टर में चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले जालौन जिले का दायित्व निर्मल सौंपा गया है जिसकी वजह से शासन की उम्मीदों पर अपने को खरा साबित करने में निर्मल कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस सम्बंध में खनन अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन के कटिबद्ध प्रयासों के चलते मई के महीने में 4 करोड़ रुपए की आय जिले में खनिज रायल्टी के रूप में शासन को हुई है। शासन ने जिले के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में 180 करोड़ रुपए का टार्गेट खनिज वसूली के क्षेत्र में निर्धारित किया है। इसे हासिल करने के लिए सभी खंडों में खनन की प्रक्रिया तेज कर दी गयी है। 33 खंडों में खनन वन विभाग की स्वीकृति की प्रतीक्षा में अटकी पड़ी है जबकि 10 आवेदकों को हाल ही में वन विभाग की एनओसी जारी कर दी गयी है।उन्होने बताया कि 21 को एल ओ आई जारी कर दी गयी है। वैसे अभी 17 खंड ही कार्यरत हैं उन्होने कहा कि पट्टे बढ़ने से बाजार में बालू की आमद में इजाफा होगा। आम लोगों को इससे सस्ते में बालू मुहैया कराई जा सकेगी।

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