उत्तर प्रदेश राजनीति लखनऊ

चुनाव बहिष्कार, नेता हैं धोखेबाज, पानी नहीं तो वोट नहीं जाने कहां कहां हुआ वोट बाहिष्कार

लखनऊ : उप्र की 13 सीटों के लिए चौथे चरण का मतदान जारी है। इस बीच कई जिलों से चुनाव बहिष्कार की खबरें आ रही हैं। ग्रामीणों ने नेताओं को धोखेबाज करार देते हुए मतदान न करने का फैसला किया है। बुंदेलखंड के कई गांवों में पानी नहीं तो वोट नहीं का नारा गूंज रहा है। सभी दलों के नेता मतदाताओं को मनाने के लिए पहुंच रहे हैं।

झांसी-ललितपुर सीट के तहत ललितपुर जिला आता है। बुंदेलखंड क्षेत्र के तहत आने वाला यह इलाका अक्सर सूखाग्रस्त रहता है। यहां के पांच गांवों ने चुनाव बहिष्कार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि- पानी नहीं तो वोट नहीं। पानी की गंभीर किल्लत झेल रहे इन गांव के लोगों ने साफ़ कह दिया है कि वोट तभी मिलेगा जब पानी मिल जाएगा। ग्रामीणों की शिकायत है कि प्रशासन मौजूद पानी के तमाम स्रोतों और इलाके के बांधों का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाई हैं, जिससे इस जिले के पांच गांवों को साल दर साल भीषण पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है।

एक बाल्टी पानी के लिए रतजगा

झांसी-ललितपुर निर्वाचन क्षेत्र में पडऩे वाले ललाउन, गुलेंदा, चकरा, कासा और राजपुर गांव में करीब 5 हज़ार वोटर हैं। यहां के लोगों को अक्सर हैंड पंपों से एक बाल्टी पानी के लिए रातभर जागना पड़ता है। यहां की ज़मीन पथरीली होने के कारण ज़मीन में पानी का स्तर काफी कम है, जिससे भूजल का पुनर्भरण संभव नहीं हो पाता। खास बात यह है ललितपुर जिले से होकर सात नदियां गुजऱती हैं। इनमें से सभी सातों नदियों के पानी का उपयोग करने के लिए 13 बांध मौजूद हैं। लेकिन ग्रामीण प्यासे हैं।

उन्नाव में ग्रामीणों ने कहा, नेता बात ही नहीं सुनते

उन्नाव के बिछिया विकास खंड की ग्राम पंचायत तारगांव के मजरे पकरा पोलिंग बूथ पर सन्नाटा पसरा हुआ है। नाराज ग्रामीणों ने विकास कार्य न होने से दुखी होकर वोटिंग का बहिष्कार का ऐलान किया है। उनका कहना है कि उनके गांव की सडक़ों में गड्ढे हैं। चुनाव से पहले उनके गांव में कोई नहीं पहुंचता। गांव की तस्वीर अब तक नहीं बदली है। इसलिए वह इस बार मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है नेता बात ही सुनते। वे झूठे और धोखेबाज हैं। इसलिए नेताओं को सबक सिखाने लिए वोट नहीं डालेंगे।

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