० मलिन बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर मंथन
उरई (जालौन)। स्वास्थ्य विभाग और पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (पीएसआई) इंडिया के तत्वावधान में टीसीआई (द चेलेंज इनीशिएटिव) परियोजना के अंतर्गत शहरी स्वास्थ्य स्तर पर विभिन्न स्टेक होल्डर्स की कार्यशाला का आयोजन कालपी रोड स्थित एक होटल में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शहरीमलिन बस्तियों में परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम लाभार्थी तक पहुंचाना है। इस मौके पर ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से शहरी स्वास्थ्य में आ रही कमियों पर चर्चा की गई और उन्हें दूर करने की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एनडी शर्मा ने कहा कि किसी भी प्रोग्राम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति उसके लिए मन से काम करें। स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में जो कमियां आ रही है, उन्हें खोजकर दूर किया जाए। इसके लिए स्वप्रेरणा से काम करें। उनके स्तर पर जो समस्याएं आएगी, वह उसका निराकरण करेंगे। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी शहरी स्वास्थ्य मिशन डा. एसडी चौधरी ने कहा कि आज परिवार नियोजन के लिए कई विधियां संचालित हो रही है। लाभार्थी को उसकी रुचि की विधि के बारे में प्रेरित कर उसे लाभ दिलाना होगा। इसके लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डा. प्रेमप्रताप ने कहा कि इस तरह की बैठकों को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के प्रतिनिधियों की सहभागिता होनी चाहिए। बाल विकास परियोजना अधिकारी विमलेश आर्या ने कहा कि वीएचएनडी और यूएचएनडी में आईसीडीएस विभाग की ओर से सहयोग किया जा रहा है। पीएसआई इंडिया की राज्य प्रतिनिधि मीनाक्षी दीक्षित, ईप्शा सिंह ने कहा कि इस तरह गोष्ठियां का आयोजन जिला स्तर पर किया जा रहा है, इसका उद्देश्य की स्टेक होल्डर्स से स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी कर उनके निराकरण की रणनीति बनाई जा सके। कार्यक्रम का संचालन शहरी स्वास्थ्य मिशन के जिला कोआर्डिनेटर संजीव चंदेरिया ने किया। इस दौरान डूडा, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और आगे भी इस तरह के कार्यक्रम में सहभागिता करने की बात कही। इस दौरान पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधि शरद श्रीवास्तव, चोब सिंह, डीसीपीएम डा, धर्मेंद्र, डा. जितेंद्र कुमार, परिवार कल्याण विशेषज्ञ ज्ञानप्रकाश पांडेय, डीईआईसी मैनेजर रवींद्र सिंह, डा. सहन बिहारी गुप्ता, धीरेंद्र प्रताप सिंह, हरिमोहन सिंह, रूबी, एसएस दुबे आदि लोग मौजूद रहे।

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