नवीन मंडी, मैनपुरी

नवीन मंडी, मैनपुरी
– फोटो : अमर उजाला

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मैनपुरी लोकसभा उप चुनाव की घोषणा के साथ ही नवीन मंडी के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में धान की फसल पर संकट मंडराने लगा है। पहले से ही अधिक आवक के चलते मंडी में धान का विक्रय नहीं हो पा रहा है, वहीं अब मंडी बंद रहने से किसानों की परेशानी और बढ़ेगी। 

चुनाव आयोग ने मैनपुरी लोकसभा सीट पर उप चुनाव की घोषणा कर दी है। दस नवंबर को इसके लिए अधिसूचना जारी हो जाएगी। चुनाव के दौरान पोलिंग पार्टियों की रवानगी से लेकर स्ट्रांग रूम बनाने और मतगणना करने का पूरा काम नवीन मंडी में ही होता है। अब जब उप चुनाव की घोषणा हो चुकी है तो नवीन मंडी के अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया है। 

70 प्रतिशत होगा मंडी का अधिग्रहण 

लगभग 70 प्रतिशत मंडी का अधिग्रहण किया जाना है। वर्तमान में धान की कटाई और विक्रय जोरों पर है, ऐसे में मंडी का अधिग्रहण किसानों और आढ़तियों के लिए चिंता का कारण बन गया है। दरअसल जिले में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती करते हैं। पूरी उपज की बिक्री भी मैनपुरी मंडी में ही होती है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा 13 नवंबर तक मंडी खाली करने के आदेश ने आढ़तियों और किसानों की नींद उड़ा दी है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अगर 13 नवंबर से मंडी खाली हो जाएगी तो धान की खरीद कब होगी। लेकिन प्रशासन कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। 13 नवंबर से लेकर 10 दिसंबर तक नवीन मंडी का 70 प्रतिशत भाग प्रशासन के अधिग्र्रहण में रहेगा। 30 प्रतिशत भाग में धान का व्यापार संभव नहीं होगा। 

ये भी पढ़ें – UP News: मैनपुरी में लोकसभा उपचुनाव से पहले धौलपुर पहुंचे अखिलेश यादव, ये है वजह

आवक के चलते बंद करनी पड़ रही है मंडी 

पहले से ही मंडी में धान की अधिक आवक के चलते समस्या खड़ी हो रही है। शुक्रवार को मंडी में इतना अधिक धान आ गया कि पूरी मंडी में कहीं धान उतारने की और वाहन निकालने की जगह ही नहीं रही। नतीजा ये हुआ कि आढ़तियों ने शनिवार को धान की खरीद ही बंद कर दी। इससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ी। वहीं अब जब मंडी का अधिग्रहण हो जाएगा तो व्यवस्था कैसे बन पाएगी। 

ये बोले मंड़ी सचिव 

मंडी सचिव नवीन कुमार कोहली का कहना है कि जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर मंडी के अधिग्रहण के लिए आढ़तियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य में सभी का सहयोग जरूरी है। 13 नवंबर तक आढ़तियों को मंडी खाली करनी होगी।

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मैनपुरी लोकसभा उप चुनाव की घोषणा के साथ ही नवीन मंडी के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में धान की फसल पर संकट मंडराने लगा है। पहले से ही अधिक आवक के चलते मंडी में धान का विक्रय नहीं हो पा रहा है, वहीं अब मंडी बंद रहने से किसानों की परेशानी और बढ़ेगी। 

चुनाव आयोग ने मैनपुरी लोकसभा सीट पर उप चुनाव की घोषणा कर दी है। दस नवंबर को इसके लिए अधिसूचना जारी हो जाएगी। चुनाव के दौरान पोलिंग पार्टियों की रवानगी से लेकर स्ट्रांग रूम बनाने और मतगणना करने का पूरा काम नवीन मंडी में ही होता है। अब जब उप चुनाव की घोषणा हो चुकी है तो नवीन मंडी के अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया है। 

70 प्रतिशत होगा मंडी का अधिग्रहण 

लगभग 70 प्रतिशत मंडी का अधिग्रहण किया जाना है। वर्तमान में धान की कटाई और विक्रय जोरों पर है, ऐसे में मंडी का अधिग्रहण किसानों और आढ़तियों के लिए चिंता का कारण बन गया है। दरअसल जिले में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती करते हैं। पूरी उपज की बिक्री भी मैनपुरी मंडी में ही होती है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा 13 नवंबर तक मंडी खाली करने के आदेश ने आढ़तियों और किसानों की नींद उड़ा दी है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अगर 13 नवंबर से मंडी खाली हो जाएगी तो धान की खरीद कब होगी। लेकिन प्रशासन कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। 13 नवंबर से लेकर 10 दिसंबर तक नवीन मंडी का 70 प्रतिशत भाग प्रशासन के अधिग्र्रहण में रहेगा। 30 प्रतिशत भाग में धान का व्यापार संभव नहीं होगा। 

ये भी पढ़ें – UP News: मैनपुरी में लोकसभा उपचुनाव से पहले धौलपुर पहुंचे अखिलेश यादव, ये है वजह

आवक के चलते बंद करनी पड़ रही है मंडी 

पहले से ही मंडी में धान की अधिक आवक के चलते समस्या खड़ी हो रही है। शुक्रवार को मंडी में इतना अधिक धान आ गया कि पूरी मंडी में कहीं धान उतारने की और वाहन निकालने की जगह ही नहीं रही। नतीजा ये हुआ कि आढ़तियों ने शनिवार को धान की खरीद ही बंद कर दी। इससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ी। वहीं अब जब मंडी का अधिग्रहण हो जाएगा तो व्यवस्था कैसे बन पाएगी। 

ये बोले मंड़ी सचिव 

मंडी सचिव नवीन कुमार कोहली का कहना है कि जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर मंडी के अधिग्रहण के लिए आढ़तियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य में सभी का सहयोग जरूरी है। 13 नवंबर तक आढ़तियों को मंडी खाली करनी होगी।





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