ख़बर सुनें

वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्रीबांके बिहारी की नगरी वृंदावन, मथुरा, गोवर्धन समेत अन्य जगह केअधिकांश होटल, रेस्त्रां और गेस्ट हाउसाें के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। न ही सही सुरक्षा के उपकरण हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 70 प्रतिशत ऐसे होटल, गेस्टहाउस, आश्रम और रेस्त्रां हैं, जहां उपकरण या तो कंडम हो चुके हैं या दिखावे के लिए लगाए गए हैं। कहीं-कहीं तो दिखावा भी नहीं है।
बृहस्पतिवार को होटल वृंदावन गार्डन में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन विभाग, मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण, मथुरा वृंदावन नगर निगम की कलई खुल गई है। बताया जा रहा है महज तीस प्रतिशत होटल संचालकों ने ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है, जबकि पूरे जिले में करीब पांच हजार से अधिक होटल, रेस्त्रां, गेस्टहाउस, आश्रम व हाईराइज बिल्डिंग हैं। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। जिसको देखते हुए शहर में तेजी से होटलों, गेस्टहाउस, रेस्टोरेंट की संख्या में इजाफा हुआ है। चौंकाने वाली बात है कि अग्निशमन विभाग ने केवल कुछ ही होटलों को एनओसी दी है।
एनओसी लेने के ये हैं नियम
बहुमंजिला इमारतों में आग से सुरक्षा के लिए हौजरील, फायर अलार्म सिस्टम, प्रिंकलर व फायर हाइड्रेंट की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। भवन के चारों ओर इतना रिक्त स्थान होना चाहिए कि आग जैसी दुर्घटना के समय फायर बिग्रेड का वाहन भवन के चारों ओर आसानी से जाकर आग बुझा सके।
प्रवेशद्वार के पास वाहन नहीं होना चाहिए, जिससे किसी भी घटना के समय आसानी से लोग बाहर निकल सकें। फायर ब्रिगेड को भवन के पास तक पहुंचने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। एक ही प्लग से बिजली के कई कनेक्शन नहीं दिए जाने चाहिए। जिस स्थान पर रसोई गैस का सिलिंडर भंडारित किया जाता है, वहां आग बुझाने के साधन होने चाहिए। भवन के पास बालू व पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। होटल,अस्पताल व अन्य प्रकार की बहुमंजिला इमारतों में स्ट्रप पम्प, फायर बीटर, सोडा एसिड, फोम व निष्क्रिय गैस भी होनी चाहिए। जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल आग बुझाई जा सके। आग बुझाने के लिए एक कर्मचारी होना चाहिए जो प्रशिक्षित हो। भवन में काम करने वाले कर्मचारियों को आग बुझाने के तरीकों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
मैनेजर का गैर जिम्मेदाराना बयान
होटल वृंदावन गार्डन में अग्निकांड में जहां दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहा है, वहीं होटल के मैनेजर ने गैर जिम्मेदाराना बयान दिया है। बसेरा ग्रुप के चेयरमैन रामकिशन अग्रवाल ने घटना के बाद से अपने दोनों मोबाइल बंद कर लिए। उनके होटल बसेरा ब्रजभूमि के मैनेजर अजय मित्तल ने मीडिया में अपनी सफाई दी। उनका कहना है कि जो दो लोगों की आग से झुलसने से मौत हुई वे बसेरा ग्रुप के कर्मचारी नहीं थे। उनका स्टोर में सोना भी गलत था। दोनों को नीचे सोना चाहिए था, पता नहीं क्यों वह दोनों ऊपर जाकर सो गए। लगता है दोनों ने शराब पी और इसके बाद मच्छर भगवाने के लिए अगरबत्ती जलाई होगी, जिससे आग लग गई। इस आग की घटना से होटल को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।

वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्रीबांके बिहारी की नगरी वृंदावन, मथुरा, गोवर्धन समेत अन्य जगह केअधिकांश होटल, रेस्त्रां और गेस्ट हाउसाें के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। न ही सही सुरक्षा के उपकरण हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 70 प्रतिशत ऐसे होटल, गेस्टहाउस, आश्रम और रेस्त्रां हैं, जहां उपकरण या तो कंडम हो चुके हैं या दिखावे के लिए लगाए गए हैं। कहीं-कहीं तो दिखावा भी नहीं है।

बृहस्पतिवार को होटल वृंदावन गार्डन में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन विभाग, मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण, मथुरा वृंदावन नगर निगम की कलई खुल गई है। बताया जा रहा है महज तीस प्रतिशत होटल संचालकों ने ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है, जबकि पूरे जिले में करीब पांच हजार से अधिक होटल, रेस्त्रां, गेस्टहाउस, आश्रम व हाईराइज बिल्डिंग हैं। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। जिसको देखते हुए शहर में तेजी से होटलों, गेस्टहाउस, रेस्टोरेंट की संख्या में इजाफा हुआ है। चौंकाने वाली बात है कि अग्निशमन विभाग ने केवल कुछ ही होटलों को एनओसी दी है।

एनओसी लेने के ये हैं नियम

बहुमंजिला इमारतों में आग से सुरक्षा के लिए हौजरील, फायर अलार्म सिस्टम, प्रिंकलर व फायर हाइड्रेंट की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। भवन के चारों ओर इतना रिक्त स्थान होना चाहिए कि आग जैसी दुर्घटना के समय फायर बिग्रेड का वाहन भवन के चारों ओर आसानी से जाकर आग बुझा सके।

प्रवेशद्वार के पास वाहन नहीं होना चाहिए, जिससे किसी भी घटना के समय आसानी से लोग बाहर निकल सकें। फायर ब्रिगेड को भवन के पास तक पहुंचने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। एक ही प्लग से बिजली के कई कनेक्शन नहीं दिए जाने चाहिए। जिस स्थान पर रसोई गैस का सिलिंडर भंडारित किया जाता है, वहां आग बुझाने के साधन होने चाहिए। भवन के पास बालू व पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। होटल,अस्पताल व अन्य प्रकार की बहुमंजिला इमारतों में स्ट्रप पम्प, फायर बीटर, सोडा एसिड, फोम व निष्क्रिय गैस भी होनी चाहिए। जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल आग बुझाई जा सके। आग बुझाने के लिए एक कर्मचारी होना चाहिए जो प्रशिक्षित हो। भवन में काम करने वाले कर्मचारियों को आग बुझाने के तरीकों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

मैनेजर का गैर जिम्मेदाराना बयान

होटल वृंदावन गार्डन में अग्निकांड में जहां दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहा है, वहीं होटल के मैनेजर ने गैर जिम्मेदाराना बयान दिया है। बसेरा ग्रुप के चेयरमैन रामकिशन अग्रवाल ने घटना के बाद से अपने दोनों मोबाइल बंद कर लिए। उनके होटल बसेरा ब्रजभूमि के मैनेजर अजय मित्तल ने मीडिया में अपनी सफाई दी। उनका कहना है कि जो दो लोगों की आग से झुलसने से मौत हुई वे बसेरा ग्रुप के कर्मचारी नहीं थे। उनका स्टोर में सोना भी गलत था। दोनों को नीचे सोना चाहिए था, पता नहीं क्यों वह दोनों ऊपर जाकर सो गए। लगता है दोनों ने शराब पी और इसके बाद मच्छर भगवाने के लिए अगरबत्ती जलाई होगी, जिससे आग लग गई। इस आग की घटना से होटल को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।





Source link

0Shares

ताज़ा ख़बरें

%d bloggers like this: