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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में आयुष्मान योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। पात्रों के आधार पर गोल्डन कार्ड जारी होने में भी मंडल फिसड्डी साबित हो रहा है। अब तक सिर्फ 26.56 फीसदी लोगों के ही गोल्डन कार्ड जारी हो सके हैं। 73.44 फीसदी ऐसे हैं, जिनके अब तक गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं। नतीजे में बगैर गोल्डन कार्ड वाले पात्रों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।
चित्रकूटधाम मंडल में गोल्डन कार्ड जारी करने में सबसे अव्वल जिला महोबा है। यहां अब तक 32.74 फीसदी पात्रों के कार्ड बने हैं। दूसरी तरफ सबसे फिसड्डी बांदा जिला साबित हो रहा है। यहां अब तक सिर्फ 22.67 फीसदी पात्रों के गोल्डेन कार्ड जारी हुए हैं।
हालांकि बांदा में पात्रों की संख्या अन्य जिलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा है। कार्ड जारी करने में दूसरे नंबर पर हमीरपुर और तीसरे नंबर पर चित्रकूट जिला है। यहां क्रमश: 29.36 और 24.88 फीसदी पात्रों को गोल्डन कार्ड जारी हो चुके हैं।
मंडल के चारों जनपदों में कुल पात्र परिवारों की संख्या 5,04,868 है। इनके सदस्यों की कुल संख्या 22,26,070 बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक मंडल में 5,91,306 पात्रों के गोल्डन कार्ड बने हैं। पिछले माह सितंबर में 12,481 पात्रों को गोल्डेन कार्ड जारी किए गए हैं। बड़ी संख्या में गोल्डन कार्ड न बनने से पात्र योजना के लाभ से वंचित हैं।
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चित्रकूटधाम मंडल में पात्रों को जारी गोल्डन कार्ड का ब्योरा-
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जनपद कुल गांव पात्र गोल्डन कार्ड फीसदी
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बांदा 650 8,11,689 1,83,988 22.67
चित्रकूट 653 4,71,162 1,17,248 24.88
हमीरपुर 466 5,54,164 1,62,679 29.36
महोबा 521 3,89,055 1,27,391 32.74
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योग- 2290 22,26,070 5,91,306 26.56
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इनसेट
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बांदा। योजना के तहत जिले में कुल 15 चिकित्सालय संबद्ध हैं। इनमें पांच निजी अस्पताल शामिल हैं। योजना में रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज सहित जिला पुरुष व महिला अस्पताल, सीएचसी नरैनी, बबेरू, कमासिन, अतर्रा, बिसंडा, जसपुरा व बहेरी सरकारी अस्पताल जुड़े हैं। निजी अस्पतालों में नवाब चैरिटी हास्पिटल, अवनी परिधि हेल्थ केयर, शाश्वत मेडिकल सेंटर, विक्रम चाइल्ड सेंटर व कमला नर्सिंग होम, अतर्रा संबद्ध हैं।
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सरकारी अस्पतालों के अलावा कैंप लगाकर गोल्डन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। कोरोना के बाद सब कुछ खुलने पर तमाम लोग महानगरों को चले गए। इसकी वजह से लोग गोल्डन कार्ड बनवाने नहीं आ रहे हैं। आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं कि जिनके गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं उन्हें प्रेरित करें। घरों में न मिलने वाले पात्रों की सूची तैयार करें। -डॉ.वीपी द्विवेदी, अपर निदेशक (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा) चित्रकूटधाम मंडल, बांदा

बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में आयुष्मान योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। पात्रों के आधार पर गोल्डन कार्ड जारी होने में भी मंडल फिसड्डी साबित हो रहा है। अब तक सिर्फ 26.56 फीसदी लोगों के ही गोल्डन कार्ड जारी हो सके हैं। 73.44 फीसदी ऐसे हैं, जिनके अब तक गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं। नतीजे में बगैर गोल्डन कार्ड वाले पात्रों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।

चित्रकूटधाम मंडल में गोल्डन कार्ड जारी करने में सबसे अव्वल जिला महोबा है। यहां अब तक 32.74 फीसदी पात्रों के कार्ड बने हैं। दूसरी तरफ सबसे फिसड्डी बांदा जिला साबित हो रहा है। यहां अब तक सिर्फ 22.67 फीसदी पात्रों के गोल्डेन कार्ड जारी हुए हैं।

हालांकि बांदा में पात्रों की संख्या अन्य जिलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा है। कार्ड जारी करने में दूसरे नंबर पर हमीरपुर और तीसरे नंबर पर चित्रकूट जिला है। यहां क्रमश: 29.36 और 24.88 फीसदी पात्रों को गोल्डन कार्ड जारी हो चुके हैं।

मंडल के चारों जनपदों में कुल पात्र परिवारों की संख्या 5,04,868 है। इनके सदस्यों की कुल संख्या 22,26,070 बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक मंडल में 5,91,306 पात्रों के गोल्डन कार्ड बने हैं। पिछले माह सितंबर में 12,481 पात्रों को गोल्डेन कार्ड जारी किए गए हैं। बड़ी संख्या में गोल्डन कार्ड न बनने से पात्र योजना के लाभ से वंचित हैं।

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चित्रकूटधाम मंडल में पात्रों को जारी गोल्डन कार्ड का ब्योरा-

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जनपद कुल गांव पात्र गोल्डन कार्ड फीसदी

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बांदा 650 8,11,689 1,83,988 22.67

चित्रकूट 653 4,71,162 1,17,248 24.88

हमीरपुर 466 5,54,164 1,62,679 29.36

महोबा 521 3,89,055 1,27,391 32.74

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योग- 2290 22,26,070 5,91,306 26.56

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इनसेट

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बांदा। योजना के तहत जिले में कुल 15 चिकित्सालय संबद्ध हैं। इनमें पांच निजी अस्पताल शामिल हैं। योजना में रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज सहित जिला पुरुष व महिला अस्पताल, सीएचसी नरैनी, बबेरू, कमासिन, अतर्रा, बिसंडा, जसपुरा व बहेरी सरकारी अस्पताल जुड़े हैं। निजी अस्पतालों में नवाब चैरिटी हास्पिटल, अवनी परिधि हेल्थ केयर, शाश्वत मेडिकल सेंटर, विक्रम चाइल्ड सेंटर व कमला नर्सिंग होम, अतर्रा संबद्ध हैं।

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सरकारी अस्पतालों के अलावा कैंप लगाकर गोल्डन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। कोरोना के बाद सब कुछ खुलने पर तमाम लोग महानगरों को चले गए। इसकी वजह से लोग गोल्डन कार्ड बनवाने नहीं आ रहे हैं। आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं कि जिनके गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं उन्हें प्रेरित करें। घरों में न मिलने वाले पात्रों की सूची तैयार करें। -डॉ.वीपी द्विवेदी, अपर निदेशक (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा) चित्रकूटधाम मंडल, बांदा





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