उत्तर प्रदेश जालौन

कचरे में अपना भविष्य खोजता नौनिहाल

० सरकार का स्कूल चलो अभियान बेअसर

उरई (जालौन )(.गोविंद सिंह दाऊ):- सरकार के स्कूल चलो अभियान को ठेंगा दिखाते हुए कुछ गरीब बच्चे कचरे के ढेर में अपना भविष्य खोजने से बाज नहीं आ रहे हैं ।
शिक्षा सत्र का आरंभ होने के पूर्व सरकारी तंत्र विभिन्न प्रकार से रंग बिरंगे बैनर छपवाकर अधिकारी अथवा राजनेता हाथ में हरी झंडी लेकर स्कूल चलो अभियान की रैली रवाना करते हुए दिख जाएंगे। विद्यालयों अथवा किसी नगर पालिका ग्राम पंचायत के सौजन्य से इस प्रकार की प्रायोजित रैलियां निकाल कर जिम्मेदार लोग अपने कर्तव्य का पालन करने की इतिश्री करके आत्ममुग्ध हो जाते हैं लेकिन धरातलीय सच्चाई से रूबरू होने की हिम्मत कोई नहीं उठाता जबकि सच्चाई यह है की सरकार के नुमाइंदों के लाख प्रयास के बावजूद भी 15 प्रतिशत बच्चे विद्यालय नहीं जाते अथवा नहीं जा पाते हैं इसके पीछे उन बच्चों की स्वेच्छाचारिता भी होती है तो कुछकी मजबूरी होती है लेकिन इस सब के पीछे उन बच्चों के अभिभावकों की शत प्रतिशत लापरवाही अवश्य होती है ।इसका परिणाम यह होता है कि आज भी शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बच्चे अपने कंधों पर गंदी प्लास्टिक की बोरी टांगें हुए कचरे के ढेर में कुछ ना कुछ गंदगी अथवा लोगों के द्वारा फेंकी गई बेकार चीजों को वीनते हुए नजर आएंगे । ग्राम जगम्मनपुर में इस प्रकार के अनेक बच्चे कचरा से कुछ न कुछ बीनकर कबाडे में बेचने में मशगूल हैं इस पर न तो प्रशासन की नजर है न ही ग्राम प्रधान ,जनप्रतिनिधि य जिम्मेदार लोग कुछ करते दिख रहे हैं समाज का यह कचरा बीनने वाला वर्ग भी पढ़ लिख कर शिक्षित बन जाए तो यह निश्चित है कि इन बच्चों का भविष्य में राष्ट्र निर्माण में सराहनीय योगदान हो सकता है ।यदि प्रशासनिक अधिकारी इन कचडा बीनने वाले बच्चों को चिन्हित कर उनके अभिभावकों को कड़ी फटकार लगाएं और ग्राम प्रधान ,चेयरमैन ,विधायक सरकारी अधिकारी कर्मचारी आदि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इन बच्चों के परिवार को इस जलालत भरे काम करने की मजबूरी से निजात दिलाने का प्रयास करें तो निश्चित रूप से समाज की इस बुराई पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकता है ।

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