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गोरखपुर जिला बदर बदमाश व सपा नेता कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर से जुड़ी फाइल रोकने, फिर घूस लेकर उसे आगे बढ़ाने के मामले में संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक कुमार वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह को सोमवार को निलंबित कर दिया गया।

अपर पुलिस महानिदेशक अभियोजन आशुतोष पांडेय ने निलंबित अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र भी जारी किया है। निलंबित संयुक्त निदेशक को इसी जुलाई में सेवानिवृत्त होना था। अपर पुलिस महानिदेशक ने महराजगंज के संयुक्त निदेशक अभियोजन राकेश श्रीवास्तव को प्रभारी अपर निदेशक अभियोजन का कार्यभार सौंपा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले रामगढ़ताल पुलिस ने हत्या व हत्या के प्रयास सहित ग्यारह मुकदमों में नामजद कपिलमुनि यादव के खिलाफ गैंगस्टर की फाइल बनाकर अभियोजन के पास भेजी थी। इस पर प्रभारी संयुक्त निदेशक अशोक कुमार वर्मा व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह ने आपत्ति लगा दी थी। इसके बाद रामगढ़ताल पुलिस ने कमी दूर की और दोबारा फाइल अभियोजन की स्वीकृति के लिए भेज दी, लेकिन नतीजा फिर वही निकला। फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।
 

 इस पर मामले की पैरवी कर रहे दीपक यादव ने संयुक्त निदेशक व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी से मुलाकात की थी। दीपक का कहना था कि भाई संजय यादव की बदमाश कपिलमुनि यादव ने बेरहमी से हत्या की थी। 2016 में हत्या के बाद संजय का शव अपने खेत में गाड़ दिया था, फिर खेत में गेहूं की बुआई कर दी थी। बाद में संजय की घड़ी मिली थी, तब जाकर हत्या का तथ्य सामने आ सका। इस मामले में दीपक ही गवाह हैं। कई बार कपिलमुनि जान से मारने की धमकी दे चुका है। इसके बावजूद गैंगस्टर की फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही।

 दीपक ने स्टिंग ऑपरेशन करने के इरादे से फाइल आगे बढ़ाने की बात की और इसी एवज में अभियोजन अधिकारियों ने घूस भी दिया। घूस देने का वीडियो बनाकर वायरल भी कर दिया। इसका संज्ञान लेकर जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने पूरे मामले की जांच एडीएम सिटी विनीत सिंह से कराई। एडीएम सिटी की जांच में घूस लेने की पुष्टि हुई।

इसी का नतीजा रहा कि जिलाधिकारी ने मामले में कड़ी कार्रवाई की सिफारिश अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी से कर दी। जिलाधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने अपर निदेशक अभियोजन अयोध्या से दोबारा जांच कराई। अपर निदेशक की जांच में भी घूस लेने की पुष्टि हुई। इसी आधार पर दोनों अफसरों को निलंबित किया गया है।  

गिरफ्तारी की तलवार लटकी, पहले से दर्ज है केस

संयुक्त निदेशक अशोक वर्मा व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह के खिलाफ कैंट थाने में भ्रष्टाचार का मुकदमा पहले ही दर्ज हो चुका। निलंबन के बाद गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से अफसर कार्यालय से दूरी बनाए हैं। यह केस दीपक यादव की तहरीर पर दर्ज हुआ था। दीपक ने ही घूस लेने का स्टिंग ऑपरेशन किया था, फिर साक्ष्यों सहित कार्रवाई की मांग शासन स्तर से की थी। अब शासन ने निलंबन की कार्रवाई की है। 

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गोरखपुर जिला बदर बदमाश व सपा नेता कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर से जुड़ी फाइल रोकने, फिर घूस लेकर उसे आगे बढ़ाने के मामले में संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक कुमार वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह को सोमवार को निलंबित कर दिया गया।

अपर पुलिस महानिदेशक अभियोजन आशुतोष पांडेय ने निलंबित अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र भी जारी किया है। निलंबित संयुक्त निदेशक को इसी जुलाई में सेवानिवृत्त होना था। अपर पुलिस महानिदेशक ने महराजगंज के संयुक्त निदेशक अभियोजन राकेश श्रीवास्तव को प्रभारी अपर निदेशक अभियोजन का कार्यभार सौंपा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले रामगढ़ताल पुलिस ने हत्या व हत्या के प्रयास सहित ग्यारह मुकदमों में नामजद कपिलमुनि यादव के खिलाफ गैंगस्टर की फाइल बनाकर अभियोजन के पास भेजी थी। इस पर प्रभारी संयुक्त निदेशक अशोक कुमार वर्मा व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह ने आपत्ति लगा दी थी। इसके बाद रामगढ़ताल पुलिस ने कमी दूर की और दोबारा फाइल अभियोजन की स्वीकृति के लिए भेज दी, लेकिन नतीजा फिर वही निकला। फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।

 



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