उत्तर प्रदेश मथुरा

कान्हा की नगरी मथुरा तब तक ठीक थी जब तक वह नगरपालिका थी।

मथुरा :- करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मथुरा नगर-निगम बन गया। टैक्स और साथ में सफाई कर्मियों को अलग धन दो नहीं तो घर के बहार सफाई को तरस जाओगे।

टैक्स के रूप में ५०० रूपए साल दो और सफाई कर्मी को घर के बहार सफाई कराने को ६०० रूपये अलग से दो तभी घर के बहार सफाई होगी। जनता जब बहुत सुखी थी, उस समय तक जनता को स्वच्छ भारत भी रास आ रहा था।

अब स्वच्छ भारत अभियान अब भड़ती कीमतों के कारण जनता को रास नहीं आ रहा है, अब मथुरा की जनता बेरोजगारी और व्यापार पर जी एस टी से जूझते हुए बैकरार हो रही है।अब ११०० रुपये साल देना अखर रहा है।

जब नगर-निगम के अधिकारियों को फोन लगाओ तब फोन के उत्तर नहीं मिलते, लिखित में दो तब भी कोई सुनवाई नहीं होती है।

मथुरा नगर-निगम महापार मुकेश आर्य बन्धु तक यह शिकायत पहुँचने से पहले उन्हें कूड़ेदान में दाल दिया जाता हैं। मथुरा नगर-निगम की जनता जब यह जानती हैं की सफाई कर्मचारी नगर-निगम से सैलरी और जनता से अलग वसूली ६०० रूपए साल तो, जनता इस मार को कितना झेले, कहा तक झेले, कब तक झेले और किसके पास शिकायते ले कर जाए ? जनता राहत की उम्मीद लगा के बैठी हैं उससे उत्तर मिलना चाहिये।

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