उत्तर प्रदेश जालौन

अधिकारियों,के रहमोकरम पर फल फूल रहा गुटके का अबैध व्यापार

० प्रतिवर्ष मनाया जाता है तंबाकू दिवस, बैठक के बाद भूल जाते जिम्मेदार

० प्राइवेट बसों से जाता है अन्य जनपदों के लिए मिक्स गुटका

०कोंच बस स्टैंड बना गुटका अबाजाही का सबसे बड़ा माध्यम

० जनपद से लेकर मंडल स्तरीय अधिकारियों को सेट किये हैं गुटका माफ़िया

उरई (जालौन)। (गोविंद सिंह दाऊ):- दर्जनों से अधिक मिश्रित गुटखा शहर में विभिन्न-विभिन्न क्षेत्रो में चोरी छिपे बनाए जा रहें है और जिसको लेकर कभी-कभी मुहिम चलाई जाती है परंतु मामला बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। करोड़ो रूपए का यह अवैध व्यापार जो कि कैंसर जैसी बीमारी को कुकरमुत्ता की तरह फैला रहा है फिर भी इस पर रोक नहीं लग पा रहीं है। आखिरकार ऐसे कौन से लोग है जिनकी क्षत्रछाया में यह धंधा फल फूल रहा है।
जानकारी के मुताबिक तुलसी नगर, मौनी बाबा मंदिर के सामने कोंच मोटर स्टैंड व मरघट के पीछें,तुलसी नगर,इन्द्रा नगर सहित इसके अलावा अडडा मंदिर आदि गुटका निर्माण के बड़े कारखाने बन चुके है इन जगहों पर मोहित, राज, महाकालेश्वर, गणेश,श्री,पारस,बाँके बिहारी, वीआईपी के अलावा अन्य गुटखे जो कि सरेआम बिक रहें है जबकि सुपाड़ी, मिश्रित गुटखा बाजार में नहीं बिक सकता है। इतना हीं नहीं इसके ऊपर अच्छा खासा जुर्माना है और जेल भेजने का प्रावधान भी है परंतु खाद्य निरीक्षक जो कि इनको नजरअंदाज कर देती है और जब ज्यादा प्रेशर पड़ता है तो वो इक्का दुक्का लोगो की चेकिंग करके अपनी कागजी खानापूर्ति पूरी करती है इसके पहले लाखों की गुटखा सामग्री पकड़ी जा चुकीं है परंतु गुटखा बनाने वालो की सेहत पर इस पर कोई फर्क नहीं हुआ क्योंकि टैक्स देना नहीं सब कुछ अवैध है और किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है इसलिए इनका व्यवसाय दिन दूगना रात चौगुना बढ़ रहा है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस जो इसको प्रतिबंधित करने के लिए मनाया गया और बताया गया कि 95 प्रतिशत मुंह का कैंसर इसे प्रयोग करने से होता है। इसके अलावा हार्ट अटैक, फेफेडो के रोग, दृष्टिविहीनता आदि रोग भी पनपते है। प्रतिवर्ष लगभग 9 लाख रूपए इसका सेवन करने से मर रहें है इसको रोकने के लिए शासन द्वारा एक टीम गठित की गई जिसमें जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्साधिकारी आदि शामिल है फिर भी यह अवैध गुटखे का निर्माण नहीं रूक रहा है। शासन के मुख्य सचिव जो टीम गठित है उसके अध्यक्ष है। आखिरकार राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के लिए इतनी लंबी चौडी फौज होते हुए भी जनपद के अंदर एक दर्जन से अधिक अवैध गुटखे बन रहें है और इनको रोकने-पकडने का न प्रयास होता है और न हीं इनके ऊपर शिकंजा कसा जाता है। गुटखा व्यवसाय जो जहां राजस्व को क्षति पहुंचा रहा है वहीं इसके खाने वालों की तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ रहीं है। तंबाकू सेवन अधिनियम 2003 कुटापा की धारा 4 के अधीन यह अपराध माना गया है। इसे पकड़े जाने पर भी अच्छा खासा जुर्माना है परंतु प्रतिदिन सुबह कोंच रोड पर स्थित प्राइवेट बस स्टैंड से पुलिस की आंखो के सामने यह अवैध गुटखा कई जगहों के लिए भेजा जाता है और इस पर न तो कार्यवाही होती है और न हीं पकड़ा जाता है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम तभी सफल हो सकता है जब जर्दा, खैनी, हुक्का, तंबाकू युक्त पान मसाला आदि जो अवैध रूप से बन रहा है उसको प्रतिबंधित किया जाएं। अन्यथा की स्थिति में यह दिवस मनते रहेंगें और लोग इसके सेवन से मरते रहेंगें। भारत में 100 रोगियों में 40 सिर्फ गुटखा इस्तेमाल करने के कारण मरते है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने लोग प्रतिदिन मर रहें है। विश्व भर में 54 लाख लोग इसका सेवन करने से मरते है। वहीं प्रति साढ़े 6 सेकेंड में मौत होती है। गुटखे का सेवन जो कि मौत को खुली दावत दे रहा है फिर भी इसको रोकने के लिए कोई भी मुहिम नहीं चलाई जाती है। अवैध गुटखा का व्यापार करने वालें जो इसी धंधे से करोड़पति बन गए है और उनको कहीं न कहीं हमारे जनप्रतिनिधि शरण दिए हुए है जिसके कारण शासन और प्रशासन भी इनको नजरअंदाज कर देता है। जिला प्रशासन से मांग की जाती है कि राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अवैध रूप से बन रहें गुटखे को पकडऩे की मुहिम चलवाए ताकि जो लोग कैंसर जैसी बीमारी से पीडि़त हो रहें है उस पर रोक लग सकें।

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