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औरैया। शहर से लेकर गांवों तक में डेंगूृ का खौफ दिखने लगा है। हालात यह हैं कि बुखार चढ़ते ही लोग जिला अस्पताल और सीएचसी में रक्त और डेेंगू की जांच कराने पहुंच रहे हैं। गुरुवार को शहर में तीन डेंगू के मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा।
शहर के 50 शैया संयुक्त जिला अस्पताल और 100 शैया युक्त जिला अस्पताल में गुरुवार को करीब 800 से अधिक मरीज पहुंचे। सातों सीएचसी में लगभग 550 मरीज पहुंचे। इसमें से अधिकांश मरीज वायरल बुखार, खांसी, जुकाम, जोड़ों में दर्द, सिर में दर्द, जी मिचलाना, गले में खराश व सिर में दर्द जैसे मर्ज लेकर पहुंचे।
चिकित्सकों ने लक्षण के आधार पर बुखार से पीड़ित मरीजों को रक्त और डेंगू की जांच कराने की सलाह दी है। वहीं, तिलक नगर के अरविंद, खानपुर की शाबाना, चिचौली निवासी राम सिंह, ओमरसाना गांव निवासी राधेश्याम समेत कई मरीजों ने प्लेटलेट्स कम होने की रिपोर्ट चिकित्सकों को दिखाई।
इसमें रक्त जांच सामान्य और डेंगू नेगेटिव था। चिकित्सकों ने बताया कि अधिकांश लोग अस्पताल में वायरल बुखार से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। बुखार में भी कभी कभार प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। मरीजों ने अधिकतर जांचें प्राइवेट में कराई हैं। कुछ रिपोर्ट सरकारी लैब की भी थी।

औरैया। शहर से लेकर गांवों तक में डेंगूृ का खौफ दिखने लगा है। हालात यह हैं कि बुखार चढ़ते ही लोग जिला अस्पताल और सीएचसी में रक्त और डेेंगू की जांच कराने पहुंच रहे हैं। गुरुवार को शहर में तीन डेंगू के मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा।

शहर के 50 शैया संयुक्त जिला अस्पताल और 100 शैया युक्त जिला अस्पताल में गुरुवार को करीब 800 से अधिक मरीज पहुंचे। सातों सीएचसी में लगभग 550 मरीज पहुंचे। इसमें से अधिकांश मरीज वायरल बुखार, खांसी, जुकाम, जोड़ों में दर्द, सिर में दर्द, जी मिचलाना, गले में खराश व सिर में दर्द जैसे मर्ज लेकर पहुंचे।

चिकित्सकों ने लक्षण के आधार पर बुखार से पीड़ित मरीजों को रक्त और डेंगू की जांच कराने की सलाह दी है। वहीं, तिलक नगर के अरविंद, खानपुर की शाबाना, चिचौली निवासी राम सिंह, ओमरसाना गांव निवासी राधेश्याम समेत कई मरीजों ने प्लेटलेट्स कम होने की रिपोर्ट चिकित्सकों को दिखाई।

इसमें रक्त जांच सामान्य और डेंगू नेगेटिव था। चिकित्सकों ने बताया कि अधिकांश लोग अस्पताल में वायरल बुखार से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। बुखार में भी कभी कभार प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। मरीजों ने अधिकतर जांचें प्राइवेट में कराई हैं। कुछ रिपोर्ट सरकारी लैब की भी थी।





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