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औरैया। नाबालिग लड़कियों के साथ अपराध करने के मामलों में कोर्ट ने एक दिन में तीन मुकदमों में सजा सुनाई। इसमें कोर्ट ने नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म व छेड़छाड़ के आरोपियों को 10 व सात साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों को 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा व विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो जितेंद्र सिंह तोमर व मृदुल मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने पुलिस के एफआर लगा देने वाले दो खास मामलों में भी सजा सुनाई है। बताया पुलिस ने विवेचना में यह कहकर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी थी कि आरोपी के खिलाफ कोई साक्ष्य प्रमाणित नहीं है। वादी ने रिपोर्ट लिखाई कि 28 जुलाई 2015 की रात उसकी 14 वर्षीय पुत्री शौच के लिए खेत गई थी। वहां पर मोनू उर्फ हरपाल सिंह ने दुष्कर्म किया। दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के उक्त मामले में पुलिस ने एफआर लगा दी थी।
पीठासीन अधिकारी (कोर्ट) ने अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर आरोपी मोनू को सुनवाई के लिए तलब किया। अभियोजन व बचाव पक्ष को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो मनराज सिंह ने अभियुक्त मोनू को 10 साल के कठोर कारावास व 20 हजार रूपये अर्थदंड से दंडित किया।
दूसरा मामला अजीतमल कोतवाली क्षेत्र का रहा। वादिनी ने रिपोर्ट लिखाई कि उसकी तीन वर्षीय पुत्री 28 जुलाई 2015 को शाम बकरियों को चराने खेतों पर गई थी। तभी गांव के दीपक कुमार ने उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। विवेचना में पुलिस ने आठ नवंबर 2015 को एफआर लगा दी। कोर्ट ने सुनवाई कर आरोपी को तलब किया। यह मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम मनराज सिंह की कोर्ट में चला। कोर्ट ने दीपक कुमार को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
तीसरा निर्णय एरवाकटरा थाना क्षेत्र का सुनाया गया। वादी ने रिपोर्ट लिखाई कि 26 अक्तूबर 2013 की सुबह लगभग चार बजे उसकी 14 वर्षीय पुत्री को गांव का शिव सिंह बहला फुसला कर ले गया था। पुलिस ने अपहरण व दुष्कर्म के आरोप में चार्जशीट पेश की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अभियुक्त शिव सिंह निवासी हिन्हापुर थाना एरवाकटरा को सात साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को जिला कारागार इटावा भेज दिया।

औरैया। नाबालिग लड़कियों के साथ अपराध करने के मामलों में कोर्ट ने एक दिन में तीन मुकदमों में सजा सुनाई। इसमें कोर्ट ने नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म व छेड़छाड़ के आरोपियों को 10 व सात साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों को 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया है।

जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा व विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो जितेंद्र सिंह तोमर व मृदुल मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने पुलिस के एफआर लगा देने वाले दो खास मामलों में भी सजा सुनाई है। बताया पुलिस ने विवेचना में यह कहकर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी थी कि आरोपी के खिलाफ कोई साक्ष्य प्रमाणित नहीं है। वादी ने रिपोर्ट लिखाई कि 28 जुलाई 2015 की रात उसकी 14 वर्षीय पुत्री शौच के लिए खेत गई थी। वहां पर मोनू उर्फ हरपाल सिंह ने दुष्कर्म किया। दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के उक्त मामले में पुलिस ने एफआर लगा दी थी।

पीठासीन अधिकारी (कोर्ट) ने अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर आरोपी मोनू को सुनवाई के लिए तलब किया। अभियोजन व बचाव पक्ष को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो मनराज सिंह ने अभियुक्त मोनू को 10 साल के कठोर कारावास व 20 हजार रूपये अर्थदंड से दंडित किया।

दूसरा मामला अजीतमल कोतवाली क्षेत्र का रहा। वादिनी ने रिपोर्ट लिखाई कि उसकी तीन वर्षीय पुत्री 28 जुलाई 2015 को शाम बकरियों को चराने खेतों पर गई थी। तभी गांव के दीपक कुमार ने उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। विवेचना में पुलिस ने आठ नवंबर 2015 को एफआर लगा दी। कोर्ट ने सुनवाई कर आरोपी को तलब किया। यह मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम मनराज सिंह की कोर्ट में चला। कोर्ट ने दीपक कुमार को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया।

तीसरा निर्णय एरवाकटरा थाना क्षेत्र का सुनाया गया। वादी ने रिपोर्ट लिखाई कि 26 अक्तूबर 2013 की सुबह लगभग चार बजे उसकी 14 वर्षीय पुत्री को गांव का शिव सिंह बहला फुसला कर ले गया था। पुलिस ने अपहरण व दुष्कर्म के आरोप में चार्जशीट पेश की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अभियुक्त शिव सिंह निवासी हिन्हापुर थाना एरवाकटरा को सात साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को जिला कारागार इटावा भेज दिया।





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