यमुना नदी

यमुना नदी
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युगल में कालिया नाग से यमुना को निजात दिला दी, लेकिन कलियुग में ब्रजवासी प्रदूषण रूपी कालिया नाग से कालिंदी को मुक्त कराने में असफल रहे। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यमुना प्रदूषण से मुक्त नहीं हो सकी। नदी में प्रदूषण अधिक पानी कम नजर आता है।
 
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी के मुताबिक भाई दूज पर भी यमुना में पर्याप्त मात्रा में प्रदूषण था, जोकि फैक्टरियों के केमिकल का था। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण जल में बहाव था। इससे सीवरयुक्त गंदगी तो खत्म हो गई परंतु केमिकल बरकरार था, जो झाग के रूप में नजर आ रहा था। साफ है कि विभागीय अधिकारी कागजों में फैक्ट्रियों पर कार्रवाई कर रहे हैं। मौके पर इनका गंदा पानी यमुना में मिल रहा है।

डीएम ने कहा था- यमुना नहीं गिर रहा प्रदूषण 

जानकारी रहे कि इस संबंध में हाईकोर्ट में जो रिट दाखिल की गई है, उसमें डीएम ने स्वयं 6 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट पहुंच कर एफिडेविट लगाया कि यमुना में कोई भी प्रदूषण नहीं गिर रहा है। डीएम के एफिडेविट के जवाब में रिट कर्ता ने 21 अक्तूबर को हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया है। 
जिसमें प्रदूषण विभाग के दावों की कलई खोली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि 18 पीईटी अपग्रेड की जा रही हैं। इनमें से अधिकांश हो चुकी हैं। सरस्वती कुंड, कोसीकला क्षेत्र में जो फैक्टरी चल रही हैं उन पर कार्रवाई चल रही है।

नगर निगम भी न रोक सका गंदगी

चाहे यमना जी के घाटों किनारे बिखरी गंदगी हो या फिर नालों से निकली गंदगी। निगम के दावे गलत साबित हो रहे हैं। आए दिन यमुना में गिरती गंदगी की तस्वीर निगम की लापरवाही उजागर करती हैं। यमुना में गंदगी रोकने के लिए तैनात की गई रिवर पुलिस कहीं नजर नहीं आती है।

विस्तार

भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युगल में कालिया नाग से यमुना को निजात दिला दी, लेकिन कलियुग में ब्रजवासी प्रदूषण रूपी कालिया नाग से कालिंदी को मुक्त कराने में असफल रहे। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यमुना प्रदूषण से मुक्त नहीं हो सकी। नदी में प्रदूषण अधिक पानी कम नजर आता है।

 

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी के मुताबिक भाई दूज पर भी यमुना में पर्याप्त मात्रा में प्रदूषण था, जोकि फैक्टरियों के केमिकल का था। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण जल में बहाव था। इससे सीवरयुक्त गंदगी तो खत्म हो गई परंतु केमिकल बरकरार था, जो झाग के रूप में नजर आ रहा था। साफ है कि विभागीय अधिकारी कागजों में फैक्ट्रियों पर कार्रवाई कर रहे हैं। मौके पर इनका गंदा पानी यमुना में मिल रहा है।

डीएम ने कहा था- यमुना नहीं गिर रहा प्रदूषण 

जानकारी रहे कि इस संबंध में हाईकोर्ट में जो रिट दाखिल की गई है, उसमें डीएम ने स्वयं 6 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट पहुंच कर एफिडेविट लगाया कि यमुना में कोई भी प्रदूषण नहीं गिर रहा है। डीएम के एफिडेविट के जवाब में रिट कर्ता ने 21 अक्तूबर को हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया है। 





Source link

0Shares

ताज़ा ख़बरें

%d bloggers like this: