रिपोर्ट : विशाल झा

गाजियाबाद. डिप्रेशन (Depression and anxiety) आजकल के जीवन का आम हिस्सा बन गया है. डिप्रेशन के लिए कई लोग दवाएं खाते हैं. वहीं कुछ लोग मनोचिकित्सकों के पास जाते हैं. लेकिन News18 Local आज आपके लिए लाया है धावक तरुण नेहरा (Runner Tarun Nehra) की कहानी. जो सभी पाठकों के लिए काफी प्रेरक साबित होगी.

52 वर्षीय तरुण नेहरा गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहते हैं. तरुण ने केवल अपनी दौड़ से डिप्रेशन को मात दे दी. बल्कि वो जो दवाएं खाते थे वो भी अब छूट गई. दरअसल, तरुण को अपने पिता की मौत के बाद सदमा लगा था. पिता के करीब होने के कारण उनके जाने से तरुण डिप्रेशन में चले गए थे.

न लगती थी भूख, न आती थी नींद

साल 2012 में तरुण के पिता का साइलेंट हार्ट अटैक (Silent Heart Attack) से निधन हो गया था. इसके बाद तरुण डिप्रेशन में चले गए. इस बीच उन्हें किसी भी काम में मन नहीं लगता था. भूख नहीं लगती थी, किसी से मिलते-जुलते भी नहीं थे. मन में कई बार सुसाइडल थॉट्स (Suicidal Thought’s) भी आते थे. घर परिवार की जिम्मेदारियां भी सिर पर थीं, इसीलिए डिप्रेशन की दवाएं लेकर काम चला रहे थे. डिप्रेशन और बेचैनी के कारण कई बार रात भर नींद भी नहीं आती थी. इसके बाद हाई ब्लडप्रेशर (High Blood Pressure) की समस्या भी होने लगी.

दौड़ने का लिया संकल्प

जब तरुण डिप्रेशन की दवाएं खा रहे थे, तब डॉक्टर ने उन्हें व्यायाम की भी सलाह दी थी. इसके बाद तरुण ने रनिंग का निर्णय किया और घर के पास स्थित इंदिरापुरम स्वर्ण जयंती पार्क में पहली बार दौड़ना चालू किया. वह लगातार 2 घंटे तक दौड़ते रहने का अभ्यास बना लिया. दौड़ने से उन्हें काफी अच्छा महसूस हुआ और एक दिन ऐसा आया कि दौड़ते-दौड़ते उनकी दवाइयां पूरी तरीके से बंद हो गईं. दौड़ने से उनके अंदर खोया हुआ आत्मविश्वास भी फिर से जागा. इस बीच तरुण के परिवार ने उन्हें काफी सपोर्ट किया.

हाफ मैराथन में ले चुके हैं हिस्सा

बीते 9 सालों में तरुण करीब 2 से अधिक हाफ मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं. 10 से अधिक फुल मैराथन और 50 किलोमीटर की दूरी वाली 8 मैराथन में भी भाग ले चुके हैं. सालाना औसत की बात करें तो तरुण करीब ढाई हजार किलोमीटर दौड़ते हैं. जनवरी 2021 में 21 घंटे में उन्होंने 141 किलोमीटर की दौड़ पूरी की थी. इसके अलावा बैकयार्ड अल्ट्रा 2021 (141 किलोमीटर रन ), नैनीताल अल्ट्रा वारियर 2022 (50 किलोमीटर रन ), मुक्तेश्वर अल्ट्रा वारियर (50 किलोमीटर ) में शामिल रह चुके हैं. अपनी जीती हुई धनराशि भी तरुण दान देते हैं.

Tags: Depression, Ghaziabad News, UP news



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