उत्तर प्रदेश जालौन

विद्युत विभाग के पूर्व में तैनात रहें दो अधिशाषी अभियंताओं को बिल में हेराफेरी करने पर मिलीं चार्जशीट?

० एक करोड 41 लाख के बिल का दिया लाभ उपभोक्ताओं को, विभाग को लगाया चूना

० मीटर की घड़ी खराब बताकर किया खुद का फीलगुड, मामला 2004 का

० राजीव गांधी विद्युतीकरण 2005 से 12 तक के मामलें भी जांच के दायरें में

० विजिलेंस जुटा रहीं है सूचना

उरई (जालौन)। (गोविंद सिंह दाऊ):- विद्युत विभाग जिसमें बिलों को लेकर ऐसा एक गडबड़झाला सामने आया कि मीटर की घड़ी खराब दर्शाकर उपभोक्ता को सीधा एक करोड़ 41 लाख का बिल माफ कर दिया गया और खुद का फीलगुड किया जिसकी जांच विजिलेंस द्वारा की जा रहीं है। संभवत: पूर्व में तैनात रहें अधिशाषी अभियंता पावर कारपोरेशन को चार्जशीट भी थमा दी गई है जो कि एक बहुत बड़ा मामला है। वहीं 2005 से 12 तक राजीव गंाधी विद्युतीकरण को लेकर जिन गांवो में काम कराया गया है उन सभी की जांच कराई जा रहीं है। इसमें भी कई अधिकारी नप सकतें है जिन्होंने अपना फीलगुड करके केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं को पलीता लगाया है।
मिलीं जानकारी के अनुसार 2004 में तैनात रहें अधिशाषी अभियंता पावर कारपोरेशन ललित कुमार और आरपी शर्मा जिन्होंने फैक्ट्री ऐरिया में स्थित रियल सीमेंट जिसका बिल 1 करोड 41 लाख रूपए का था। मीटर की घड़ी खराब बताकर उस बिल को निपटा दिया और बदलें में अपना फीलगुड कर लिया। इसमें अधिशाषी अभियंताओं की जिम्मेंदारी फिक्स संभवत: की गई है। चूंकि यह मामला विजिलेंस द्वारा जांच किया जा रहा है और मामलें में शत-प्रतिशत सच्चाई है। 1 करोड 41 लाख रूपए का बिल सीधें-सीधें ठीक कर देना, बिना किसी की जानकारी में आए यह सिद्व करता है कि अधिशाषी अभियंता पावर कारपोरेशन एवं रियल सीमेंट के मालिक जो आपस में मिल गए और उन्होंने विभाग के ऊपर लंबा चूना लगा दिया। इसके अलावा और भी मामलें विभाग में चल रहें है जिनकी जांचें कराई जा रहीं है क्योंकि यह मामला लगभग 15 साल पहले का है दोनो अधिशाषी अभियंता यहां से विदा हो चुकें है। मामला धीमें-धीमें जांच के दौरान पकता रहा और जब पूरा पक गया तो सारी हकीकत सामने आ गई। सवाल यह उठता है कि अगर मीटर की घड़ी खराब थी तो बदला क्यों नहीं गया। क्या मीटर विभाग में इसकी शिकायत की गई थी और की गई थी तो मीटर बदलने के उपरांत रीडिंग लेना चाहिए थी परंतु यह कुछ भी नहीं किया गया। सीधा-सीधा आया राम गया राम में मामला निपटा दिया गया। वहीं राजीव गंाधी विद्युतीकरण योजना जो 2005 से 12 तक जनपद में चलाई गई। जगह-जगह तार, खंभे बदलें गए। 7 साल तक यह योजना चलतीं रहीं इस येाजना का कितना मकसद पूरा हुआ, किन-किन गांवो में विद्युत कनेक्शन हुए इन सभी मामलों की जांच कराई जा रहीं है और विजिलेंस एक-एक खामियों को अपने स्तर से देख रहीं है। अगर कहीं कोई दिक्कत होती है तो विभागीय अधिकारियों से संपर्क साधा जा रहा है। आश्चर्य किंतु सच। अगर एक फैक्ट्री का 1 करोड 41 लाख का बिल खत्म किया जा सकता है तो फैक्ट्री एरिया में दर्जनो लोहा गलाने वाली फैक्ट्री (फरनिस) लगी हुई थी तो फिर कितनो का बिल इस तरह से सुलटाया गया होगा यह एक जांच का विषय है। वहीं जानकारी के अनुसार कुछ पैथालॉजी लैबों के बिल भी 65 लाख रूपए है और जिन्हें विवेचना अधिकारी से यह कहकर सुलटाने का प्रयास किया गया कि जिस समय विद्युत चोरी पकड़ी गई तो वों अपना जनरेटर चला रहें थे विद्युत से कोई मतलब नहीं था। इस तरह के सारे मामलें जांच के दायरे में है और जल्द हीं वास्तविकता उजागर होगीं और 1 करोड 41 लाख रूपए की तलवार जो अधिशाषी अभियंताओं के गले की फंास बनीं हुई है उन्हें कानून के दायरे में ले जाकर जेल की हवा भी खाना पड़ सकतीं है।

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