गौरीगंज : जिला अस्पताल की लैब में बीमारियों की जांच करते स्वास्थ्य कर्मी। -संवाद

गौरीगंज : जिला अस्पताल की लैब में बीमारियों की जांच करते स्वास्थ्य कर्मी। -संवाद
– फोटो : AMETHI

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गौरीगंज (अमेठी)। स्वाइन फ्लू का मरीज मिलने पर जिले में उसके इलाज का पूरा इंतजाम है, लेकिन जिले के अस्पतालों में जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। लक्षण दिखने व उसकी स्थिति गंभीर होने पर जांच के लिए सैंपल एकत्रकर उसी दिन लखनऊ स्थित केजीएमयू भेजने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से बनाई गई है।
प्रदेश के कई जिलों में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद शासन ने अलर्ट जारी किया है। शासन के निर्देश पर जिले में स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था बनाई गई है। इसकी दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों को भर्ती कराने के लिए अलग से वार्ड भी चिह्नित कर लिए गए हैं। इसी तरह चिकनगुनिया की पुष्टि के लिए होने वाली आईजीएम जांच की भी जिले में कोई व्यवस्था नहीं है।
जिले के तकरीबन सभी अस्पतालों में डेंगू मरीजों की प्रारंभिक जांच के लिए कार्ड की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है। कई दिनों से बुखार पीड़ित मरीजों की जांच कार्ड से की जाती है। कार्ड में पॉजिटिव आने के बाद पुष्टि के लिए उनका सीरम सैंपल लेकर एलाइजा जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। एलाइजा जांच में पुष्टि होने के बाद ही मरीज को डेंगू पॉजिटिव माना जाता है।
संचारी रोग के नोडल अफसर/ एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि जिले में स्वाइन फ्लू व चिकनगुनिया के लक्षण वाले कोई भी मरीज नहीं मिले हैं। लक्षण दिखने पर उन्हें तत्काल भर्ती कर इलाज करने की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। इसमें दी जाने वाली दवाइयों की भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है।

गौरीगंज (अमेठी)। स्वाइन फ्लू का मरीज मिलने पर जिले में उसके इलाज का पूरा इंतजाम है, लेकिन जिले के अस्पतालों में जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। लक्षण दिखने व उसकी स्थिति गंभीर होने पर जांच के लिए सैंपल एकत्रकर उसी दिन लखनऊ स्थित केजीएमयू भेजने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से बनाई गई है।

प्रदेश के कई जिलों में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद शासन ने अलर्ट जारी किया है। शासन के निर्देश पर जिले में स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था बनाई गई है। इसकी दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों को भर्ती कराने के लिए अलग से वार्ड भी चिह्नित कर लिए गए हैं। इसी तरह चिकनगुनिया की पुष्टि के लिए होने वाली आईजीएम जांच की भी जिले में कोई व्यवस्था नहीं है।

जिले के तकरीबन सभी अस्पतालों में डेंगू मरीजों की प्रारंभिक जांच के लिए कार्ड की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है। कई दिनों से बुखार पीड़ित मरीजों की जांच कार्ड से की जाती है। कार्ड में पॉजिटिव आने के बाद पुष्टि के लिए उनका सीरम सैंपल लेकर एलाइजा जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। एलाइजा जांच में पुष्टि होने के बाद ही मरीज को डेंगू पॉजिटिव माना जाता है।

संचारी रोग के नोडल अफसर/ एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि जिले में स्वाइन फ्लू व चिकनगुनिया के लक्षण वाले कोई भी मरीज नहीं मिले हैं। लक्षण दिखने पर उन्हें तत्काल भर्ती कर इलाज करने की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। इसमें दी जाने वाली दवाइयों की भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है।





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