उत्तर प्रदेश जालौन

न कोई मुद्दा न कोई विकास, जनता है बदहाल, नेता हुए मालामाल।।

रामपुरा (जालौन):- (कुलदीप रामपुरा):- सत्रहवीं लोकसभा चुनाव में जालौन गरौठा भोगनीपुर संसदीय क्षेत्र में विभिन्न दलों के प्रत्याशी क्षेत्रीय मुद्दों से कन्नी काटते दिखाई देते हैं।किसी भी प्रत्याशी द्वारा अभी तक यह नहीं बताया गया है कि वह संसदीय क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों को हल करने के लिए क्या करेंगे। जबकि संसदीय क्षेत्र की जनता स्थानीय मुद्दों को हल करने को प्राथमिकता दे रही है। इस संसदीय क्षेत्र के भाग्य का फैसला उन्नीस लाख चौंतीस हजार सात सौ मतदाता लगभग कौन सांसद बनेगा इसका फ़ैसला करेंगे। इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली पांच विधानसभाएं कृमश उराई, माधौगढ़, कालपी, भोगनीपुर गरौठा है। इन विधानसभाओं की गिनती अति पिछड़े क्षेत्र के रूप में होती है। क्योंकि १९५२के प्रथम लोकसभा चुनाव से लेकर सन् २०१४तक यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित क्षेत्र रहा है। इस क्षेत्र में अनेकानेक दस्यु गैंग का बोलबाला रहा है। राजनीति भी उन्हें संरक्षण देती रही। इस कारण इस संसदीय क्षेत्र का विकास पूरी तन्मयता के साथ नहीं हो पाया है। और न ही आजादी से लेकर अब तक इस क्षेत्र में कोई उद्योग धंधे लगाए गए। यहां के कुछ सम्पन्न लोगों ने शहर या कस्बे में अपने घर बना लिये है। वहीं गरीब व्यक्ति आज भी गांवों में गरीबी का दंश झेल रहा है।इन गरीब किसानो को लघु सीमांत किसान कहा गया है। इस क्षेत्र का बेरोजगार, नौजवान अपने परिवार के पालन-पोषण हेतु अन्य प्रदेशों में शरणागत है। जहां वह पानी पूड़ी का धंधा कर अपना और अपने परिवार का जरिया चला रहा है। इस क्षेत्र के किसान का बुरा हाल है।वह कर्ज के बोझ से दबा हुआ है।साल भर खेती में मेहनत करने के बाद भी उसको अच्छी फसल नहीं मिल पाती है। क्योंकि इस क्षेत्र में कृषकों के पलेवा के लिए एक मात्र नहर के पानी का सहारा है।जो फसलों को पानी देने में सक्षम नहीं है। कहने को तो यहां सरकारी तंत्र ने सैकड़ों ट्यूवैल लगाए लेकिन उनमें अधिकांश खराब पड़े हैं या मात्र दिखावा में है। यहां पर इन टयवूलो पर आपरेटर भी नहीं है। ऐसे में किसान फसल उत्पादन के लिए आसमान की ओर निहारता हैं। लेकिन पानी यहां पर बेमौसम बरसता है। जिसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। यह क्षेत्र विगत कई वर्षों से सूखे का दंश झेल रहा है। सरकारी तंत्र योजनाएं क्रियान्वित करने का काम करता है।सूखा राहत पैकेज देता है। लेकिन धरातल पर परखा जाए तो राहत राशि का भुगतान भृष्टाचार का शिकार हो जाता है। किसानों के हाथ कुछ ही लाभ प्राप्त हो पाता है। इसीलिए पूर्व में माना गया था कि सरकारी तंत्र के द्वारा दिया गया धन का कुछ ही अंश किसान तक पहुंच पाता है। उक्त संसदीय क्षेत्र में प्रत्याशियों के द्वारा इन मुद्दों को हल करने की ठोस पहल कभी भी नहीं की गई। और न ही भविष्य में उम्मीद की जा सकती है कि कोई प्रत्याशी ठोस पहल कर पाएंगा। मुद्दा विहीन इस चुनाव में जनता निराश हैं। और वह साल भर की एक मात्र फ़सल वो काटने में उलझा हुआ है। क्योंकि वह साल भर इसी फ़सल से कर्ज की किश्त भी भरता है। और परिवार का जीवन यापन करने का भी उसका यही जरिया है। उसकी चुनाव में कोई रूचि नहीं दिखाई दे रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता व समाज सेवी रामकुमार द्विवेदी अंढाई का कहना है कि फटेहाल किसान, बेरोजगार नौजवान,सूखे कुएं, सूखे पड़े तालाब, बंद पड़ी चीनी मिल,घी और गुड़ की बंद पड़ी मंडी अन्य समस्याएं इस क्षेत्र की बदहाली का बयान करते हैं। जबकि सरकार की नजर में सब ठीक ठाक है। सरकार की नजर में कुएं और तालाब पानी में लबालब भरे हुए हैं। किसान की अच्छी फसल के रिकार्ड बनाकर तैयार कर लिये गये है। यह इस क्षेत्र की जनता के साथ छलावा है। हां इतना जरूर है कि यहां से बनने वालों सांसदसभी सांसद मालामाल हो गये है। यहां के क्षेत्रीय विधायक भी इसी कृम में है।जब तक इस क्षेत्र का समुचित विकास न हो तब तक कोई भी लोकसभा सदस्य बनें वह जनता का दुलारा नहीं बन सकता है। इस संसदीय क्षेत्र में प्रत्याशियों से अपील की है कि वह जब सांसद बन जाएं। इस क्षेत्र की जनता की बदहाली संसद की कार्यवाही में अवश्य रखें। सरकार को इस ओर ध्यान देने को बाध्य करे । क्योंकि कोई भी काम सिर्फ कागजी फाईलों में नहीं बल्कि धरातल पर सौ प्रतिशत दिखाई देना चाहिए। ताकि इस क्षेत्र का किसान खुशहाल हो , बेरोजगारों का पलायन रुक सके। इस क्षेत्र की मूल समस्या है कि सिंचाई , अन्ना पशु, बेरोजगारी, टूटी-फूटी सड़कें,खाद बीज ही यहां की प्रमुख समस्याआें का जखीरा है।जिसका निदान होना चाहिए जनता ने यहां हर एक मौका दिया पर विकास नहीं हो पाया है।खास तौर से माधौगढ़ विधानसभा में अन्ना पशुओं पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बरसों से बंद पड़ी चीनी मिल भी चलाने की जरूरत है। बंद पड़े ट्यूवैल चलवाए जाएं, किसानों को समय से सुविधाएं मुहैया कराई जाए। गरीबों के हितैषी काम किये जाएं। शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। स्वास्थ्य व्यवस्था भी चुस्त दुरूस्त करने की बात है। सड़क, बिजली और पानी भी प्रमुख समस्याआें का अंबार है। यहां के विकास के बारे में अदम गोंडवी साहब का शेर है कि
तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है।मगर ये बात झूठी है कि ये बात किताबी है।।
तुम्हारी मेज़ चांदी की तुम्हारे जाम सोने के
यहां जुम्मन के घर में आज भी टूटी रकाबी है।

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