हाइलाइट्स

बृजेश व मुख्तार में 1996 के बाद से बढ़ी रार
हाईकोर्ट से मिली बृजेश को जमानत मुख्तार गैंग बेचैन
बाहुबली मुख्तार अंसारी के काफिले पर जब डॉन ने की थी अंधाधुंध फायरिंग

वाराणसी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 साल पुराने केस में वाराणसी जेल में बंद माफिया डॉन बृजेश सिंह को सशर्त जमानत मिल गई है. पूर्वांचल के बाहुबली और पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह गुरुवार की शाम को 14 साल बाद जेल से बाहर आए. बृजेश सिंह पर मऊ के तत्कालीन विधायक और बाहुबली मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने का आरोप है. मुख्तार अंसारी इन दिनों बांदा जेल में बंद हैं. बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी. इन दोनों की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. ऐसी दुश्मनी, जिसने पूरे पूर्वांचल को हिला कर रख दिया और कई लोगों की जानें चली गई. बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की दोस्ती, दुश्मनी में बदल गई.

मामला तब बिगड़ा जब साल 1991 में वाराणसी के पिंडरा से विधायक अजय राय के भाई अवधेश की मौत की खबर सुनकर बृजेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. अवधेश की हत्या में मुख्तार अंसारी और उसके गैंग का नाम सामने आया. मुख्तार अंसारी ने 1996 में पहली बार विधानसभा सदस्य बनने के बाद से बृजेश सिंह की जरायम की सत्ता को चुनौती देने लगा.

जानिए क्या है उसर चट्टी कांड
इसके बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की अदावत बढ़ गई. 1996 में मुख्तार अंसारी पहली बार विधायक बना और उसका रुतबा बढ़ गया. गाजीपुर में 15 जुलाई 2001 को मोहम्मदाबाद थानाक्षेत्र के उसर चट्टी इलाके में तत्कालीन मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी के काफिले पर बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह ने मिलकर जानलेवा हमला किया था. दिन में दोपहर 12:30 बजे हुए इस हमले में मुख्तार अंसारी के गनर समेत तीन लोगों की मौत हुई थी.

बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह. (फाइल फोटो)

बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह. (फाइल फोटो)

तभी यह चर्चा हुई बृजेश सिंह क्रॉस फायरिंग में मारा गया. सालों तक बृजेश सिंह अंडर ग्राउंड रहा और उसने अपना कारोबार छिपकर संचालित किया. बृजेश सिंह पर यूपी पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जब दिल्ली स्पेशल सेल ने उसे भुवनेश्वर से बड़े नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया था. बता दें कि ब्रजेश सिंह पर 41 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें से 15 में उसे बरी किया जा चुका है.

राजनीति में भी दबदबा
पूर्व विधान परिषद बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह बीते विधान परिषद के चुनाव में वाराणसी से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीती है. वाराणसी जेल में बंद बृजेश सिंह ने पत्नी को चुनाव जिताने में सफलता प्राप्त की, जबकि मैदान में भाजपा तथा समाजवादी पार्टी के भी प्रत्याशी डटे थे. बृजेश सिंह के बड़े भाई उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह भी इस सीट से एमएलसी रह चुके हैं. मौजूदा समय में बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह चंदौली जिले की जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्हें पूर्वांचल में भाजपा के कद्दावर नेता माना जाता है.

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