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औरैया। कृषि विज्ञान केंद्र ग्वारी की ओर से ब्लॉक भाग्यनगर में एक दिवसीय जल शक्ति अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक अंकुर झा ने सरसों की खेत में फसल उत्पादन बढ़ाने व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
गोष्ठी में गृह वैज्ञानिक डॉ. रश्मि ने जल ही जीवन है पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी सूखा तो कभी बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों को फसलों में हानि उठानी पड़ रही है। यह सब प्रदूषण के कारण हो रहा है।
प्रदूषण सिर्फ कारखानों से नहीं पराली जलाने ने से भी होता है। इसलिए किसान पराली न जलाएं। उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद पराली को खेत में डीकंपोजर का इस्तेमाल कर खाद बनाएं। इससे फसल का उत्पादन बढ़ेगा और उपज भी अच्छी होगी। जब फसल को खाद और खेत की उर्वराशक्ति अच्छी मिलती तो खाद, पानी भी कम लगता है। किसानों को इस विधि का इस्तेमाल करना चाहिए।

औरैया। कृषि विज्ञान केंद्र ग्वारी की ओर से ब्लॉक भाग्यनगर में एक दिवसीय जल शक्ति अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक अंकुर झा ने सरसों की खेत में फसल उत्पादन बढ़ाने व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

गोष्ठी में गृह वैज्ञानिक डॉ. रश्मि ने जल ही जीवन है पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी सूखा तो कभी बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों को फसलों में हानि उठानी पड़ रही है। यह सब प्रदूषण के कारण हो रहा है।

प्रदूषण सिर्फ कारखानों से नहीं पराली जलाने ने से भी होता है। इसलिए किसान पराली न जलाएं। उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद पराली को खेत में डीकंपोजर का इस्तेमाल कर खाद बनाएं। इससे फसल का उत्पादन बढ़ेगा और उपज भी अच्छी होगी। जब फसल को खाद और खेत की उर्वराशक्ति अच्छी मिलती तो खाद, पानी भी कम लगता है। किसानों को इस विधि का इस्तेमाल करना चाहिए।





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