चीनी मांझे से दुबग्गा निवासी शोएब हैदर का गला हैदरगंज के पुल पर कटा जहां दोनों रेलिंग पर काफी ऊंचाई तक तार बंधे हैं। बावजूद इसके शोएब चीनी मांझा की चपेट में आ गए और जान गंवा बैठे। जानकार बताते हैं कि सआदतगंज, अकबरीगेट, वजीरबाग, मोहिनीपुरवा, हुसैनगंज इलाकों में चोरी छिपे चीनी मांझा की बिक्री जारी है। यहां सट्टा लगाकर पतंगबाजी भी होती है। इसी वर्ष जनवरी में ही सीएम पोर्टल पर इस बाबत शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।

नायलॉन के धागे पर कांच की कोटिंग के बाद तैयार चीनी मांझा एक झटके में किसी की भी जान ले सकता है। सामान्य मांझा हाथ से टूट जाता है जबकि चीनी को काटने के लिए कैंची का इस्तेमाल करना पड़ता है। जब भी चीनी मांझा से कोई हादसा होता, दुकानदार इसकी बिक्री रोक देते हैं। पुलिस को भी छापे में कुछ नहीं मिलता। मामला शांत होने पर फिर कारोबारी सक्रिय हो जाते हैं। पुराना लखनऊ इसका सबसे बड़ा गढ़ है।

व्यापारी नेता बोले, कारोबार नहीं यह हत्या है

व्यापारी समाज ने चीनी मांझा पर इस बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। कहा कि प्रतिबंधित सामान बेचना अपराध है। ऐसे दुकानदारों से व्यापारिक संगठनों को कोई हमदर्दी नहीं है। पुलिस को इनके खिलाफ सख्त अभियान चलाना चाहिए।

लापरवाही की वजह से जारी है बिक्री

लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र का कहना है कि पुलिस को छापा मारना चाहिए। कहीं तो चीनी मांझा बिक रहा है जिससे ऐसी घटनाएं हो रही हैं। मेरे हिसाब से यह हत्या है। पुलिस, प्रशासन व नगर निगम की मॉनीटरिंग टीमों की लापरवाही की वजह से ही बिक्री जारी है।

ऐसे दुकानदारों को पकड़वाएंगे

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष सुरेश छाबलानी ने कहा कि जो लोग इसका कारोबार कर रहे हैं उनसे तो पहले भी अपील की गई थी कि प्रतिबंधित सामानों की बिक्री न करें। अब वो नहीं मान रहे तो हम लोग चीनी मांझा बेचने वालों को पकड़वाएंगे।

सरकार ऑनलाइन बिक्री पर लगाए लगाम

उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता का कहना है कि ऑनलाइन खुले आम चीनी मांझा बिक रहे हैं, जिनकी सरकार को निगरानी करनी चाहिए। पतंग विक्रेता एसोसिएशन चीनी मांझा के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं। हम भी इसके खिलाफ हैं।

 



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