
यूपी के पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद (फाइल फोटो)
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सड़कों के लिए मिला भारी-भरकम बजट किसके कारण सरेंडर हुआ, यह अभी तक रहस्य ही बना हुआ है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी मंत्री ने दो माह पहले कार्रवाई के लिए प्रस्ताव मांगा था लेकिन सेतु निगम के 502 करोड़ रुपये का बजट लैप्स होने के अलावा किसी अन्य मामले में अभी तक कोई जवाबदेही तय नहीं हुई है।
पीडब्ल्यूडी के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के मूल बजट में 24590 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। इसमें अधिष्ठान की राशि शामिल नहीं है। 18627 करोड़ रुपये सड़कों के लिए, 3049 करोड़ रुपये सेतुओं के लिए और 277 करोड़ रुपये भवन मद में व्यवस्था की गई। स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत विभिन्न कामों के लिए 2134 करोड़ रुपये दिए गए।
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पुनर्विनियोग की राशि को भी जोड़ दें तो वित्त वर्ष 2022-23 में पीडब्ल्यूडी को कुल 27140 करोड़ रुपये का बजट दिया गया। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, इसमें से 8914 करोड़ रुपये 31 मार्च तक उपयोग में न आने के कारण सरेंडर करने पड़े। जोकि, कुल आवंटित बजट का करीब 33 प्रतिशत रहा। यह स्थिति तब रही, जब प्रदेश की काफी सड़कें खस्ताहाल हैं।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए 20 अप्रैल को पीडब्ल्यूडी मंत्री के विशेष कार्याधिकारी अभय रंजन सिंह ने विभाग के प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्ष को पत्र भेजा। इसमें कहा गया कि प्राविधानित बजट के सापेक्ष समर्पित और लैप्स हुई राशि के संबंध में तिथिवार विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भी मांगा गया था।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि अगर यह कार्रवाई समय से शुरू हो जाती तो कई अधिकारियों के प्रमोशन अटक जाते। यही वजह रही कि पत्र को ही दबा दिया गया। अलबत्ता, सेतु निगम के बजट लैप्स मामले में मुख्य अभियंता, सेतु के खिलाफ कर्मचारी सेवा नियमावली के तहत जांच प्रारंभ की गई है।
