राजधानी लखनऊ में सरकारी अस्पतालों में शाम ढलते ही चिकित्सकीय जांच की मशीनें बंद हो जाती हैं। इससे मरीजों को या तो निजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है या अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। छोटे अस्पतालों में तो अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एक्सरे जैसी आवश्यक जांच में भी बाधा आती है, जबकि आपातकालीन जांच की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध होनी चाहिए। वर्तमान में कुछ ही अस्पतालों में यह सुविधा हर समय मिल पाती है। अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि मैनपावर की कमी से 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध कराना मुश्किल है।

बलरामपुर अस्पताल

बलरामपुर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन मशीन तो है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की रात में ड्यूटी न होने के कारण शाम के बाद सीटी स्कैन कराना आसान नहीं है। मरीजों को अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, सीएमएस डॉ. हिमांशु के अनुसार, रात दस बजे तक सीटी स्कैन की सुविधा मिल जाती है और अत्यंत आवश्यक होने पर ऑन कॉल बुलाकर जांच की जाती है।

ठाकुरगंज

ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय के रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी विभाग की यूनिट रात में बंद हो जाती है। सीएमएस डॉ. एसपी सिंह के अनुसार, यहां रेडियोलॉजी विभाग में तीन टेक्नीशियन होने के बावजूद रात में जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

रानीलक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय

रानीलक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में भी रात के वक्त एक्सरे की यूनिट बंद हो जाती है, जिससे मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है। सीएमएस डॉ. नीलमा सोनकर ने बताया कि रात में ऑन कॉल टेक्नीशियन बुलाकर जांच कराई जाती है।

सीएचसी में रात में एक्सरे की सुविधा का अभाव

सीएमओ के अधीन संचालित 20 सीएचसी में से 11 ग्रामीण सीएचसी में एक्सरे जांच की सुविधा है। विभाग ने जांच के लिए निजी कंपनी से अनुबंध भी किया है। इसके बावजूद, रात के समय दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है, उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। पैथोलॉजी जांच की स्थिति भी ऐसी ही है। सीएचसी में रात के वक्त आपातकालीन जांच की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाती है।

पीपीपी मॉडल पर चल रही सीटी स्कैन मशीनें देती हैं 24 घंटे सुविधा

हालांकि, सिविल और लोकबंधु अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन मशीनें स्थापित हैं, जहां रात में भी जांच की सुविधा है। इन अस्पतालों के प्रभारियों का कहना है कि सीटी स्कैन की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है, क्योंकि टेक्नीशियनों की ड्यूटी शिफ्ट में लगाई जाती है।



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