वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को करीब 220 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। यह आय पूरी तरह श्रद्धालुओं की ओर से मंदिर को दिए गए दान और चढ़ावे पर आधारित है, जिसमें रामलला की हुंडी (दान पात्र) सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। मंदिर ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार, एक अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक के आंकड़ों की रिपोर्ट 21 मार्च को हुई ट्रस्ट बैठक में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, रामलला की हुंडी में सबसे अधिक 54.79 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ, जो श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाता है।

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इसके अलावा दान काउंटर से 18.88 करोड़ रुपये, ऑनलाइन माध्यम से 8.33 करोड़ रुपये का योगदान मिला। वहीं एफसीआरए (विदेशी दान) के तहत मात्र 78 लाख रुपये ही प्राप्त हुए, जो इस वर्ष सबसे कम रहा। कुल मिलाकर विभिन्न माध्यमों से 82.78 करोड़ रुपये दान के रूप में आए।

मंदिर ट्रस्ट को बैंक में जमा राशि पर करीब 138 करोड़ रुपये का ब्याज भी प्राप्त हुआ, जिससे कुल आय बढ़कर 220.81 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। राम मंदिर की पूरी व्यवस्था श्रद्धालुओं के दान पर ही आधारित है। यहां दर्शन से लेकर सभी सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क हैं। मंदिर निर्माण से लेकर परिसर के अन्य प्रकल्प भी श्रद्धालुओं के निधि समर्पण से ही साकार हो रहे हैं। मंदिर परिसर में गर्भगृह से लेकर प्रवेश मार्ग तक छह से आठ दान पात्र स्थापित हैं, लेकिन सबसे अधिक चढ़ावा गर्भगृह में स्थित रामलला की हुंडी में ही अर्पित किया जा रहा है।



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