मुबारकपुर क्षेत्र में शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुए अली अकबर हत्याकांड में 27 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को इस घटनाक्रम में 12 लोगों को दोषी करार दिया। दोषियों में तीन सगे भाई हैं। सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मौत हो चुकी है। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि तय की है।

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बेकाबू हो गए थे हालात

अली अकबर हत्याकांड के बाद हालात बेकाबू हो गए थे। मुबारकपुर में दंगा भड़क गया था। पुलिस की सख्ती से कुछ समय के लिए माहौल शांत हो गया था, लेकिन 2000 में फिर समुदायों के बीच तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। 25 जनवरी 2000 को पूरा दुल्हन और शाह मोहम्मदपुर के बीच लूटपाट की घटना हुई थी। वाराणसी से लौट रहे सुन्नी समुदाय के लोगों पर हमला किया गया था। इस दंगे में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी तो कर्फ्यू लगाना पड़ा।

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5 नवंबर 2000 को तीसरी बार हिंसा भड़क उठी। शिया समुदाय की दुकानों पर बम से हमला किए जाने की घटनाएं सामने आई। हिंसा में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई महीने तक मुबारकपुर क्षेत्र में कर्फ्यू रहा था।



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