Anganwadi training Jansath के तहत उत्तर प्रदेश के Muzaffarnagar जिले के जानसठ क्षेत्र में नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के लिए सात दिवसीय आवासीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। यह पहल बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की सेवाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जिला ग्राम्य विकास संस्थान, जानसठ में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकत्रियों को प्रशासनिक दक्षता से लेकर सामाजिक जिम्मेदारियों तक का समग्र प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
🔴 कार्यक्रम का उद्देश्य और आयोजन की रूपरेखा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान (बख्शी का तालाब) के महानिदेशक और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उत्तर प्रदेश के निदेशक के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है, बल्कि उन्हें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता से भी सशक्त बनाना है।
Anganwadi training Jansath के तहत प्रतिभागी कार्यकत्रियों को आवासीय व्यवस्था में रखा गया है, ताकि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और टीमवर्क की भावना विकसित कर सकें। यह प्रशिक्षण केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समूह चर्चा, व्यावहारिक सत्र और केस स्टडी के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों का अभ्यास भी कराया जा रहा है।
🔴 मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका और प्रशिक्षण की दिशा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुभवी मास्टर ट्रेनर्स की एक विशेष टीम तैनात की गई है, जो विभागीय कार्यों की बारीकियों से लेकर आधुनिक प्रशासनिक तकनीकों तक का मार्गदर्शन कर रही है। डीपीओ मास्टर ट्रेनर संतोष कुमार शर्मा ने कार्यकत्रियों को विभागीय ढांचे, उनकी जिम्मेदारियों और सरकारी योजनाओं की संरचना के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां सरकार और समाज के बीच की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनके कार्य से ही यह सुनिश्चित होता है कि पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचें।
🔴 आधुनिक तकनीक और डेटा प्रबंधन पर विशेष सत्र
Anganwadi training Jansath कार्यक्रम के दौरान मास्टर ट्रेनर राहुल कुमार ने कार्यकत्रियों को डिजिटल युग की आवश्यकताओं से अवगत कराया। उन्होंने मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम और डेटा संग्रह के आधुनिक तरीकों पर प्रशिक्षण दिया।
उनका कहना था कि आज के समय में पारदर्शिता और त्वरित जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है। यदि आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ा हर डेटा सही और समय पर अपलोड होता है, तो योजनाओं की निगरानी और सुधार दोनों में आसानी होती है।
🔴 क्षेत्रीय चुनौतियों पर खुली चर्चा
मास्टर ट्रेनर सुभाष चंद्र उपाध्याय ने प्रशिक्षण सत्र के दौरान क्षेत्र में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कुपोषण, स्कूल ड्रॉपआउट, टीकाकरण में जागरूकता की कमी और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच जैसे मुद्दे अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
Anganwadi training Jansath के तहत कार्यकत्रियों को यह सिखाया जा रहा है कि वे इन समस्याओं का समाधान कैसे खोजें, समुदाय के साथ संवाद कैसे स्थापित करें और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें।
🔴 कुपोषण निवारण और बाल स्वास्थ्य पर फोकस
प्रशिक्षण का एक बड़ा हिस्सा कुपोषण निवारण और बाल स्वास्थ्य पर केंद्रित है। कार्यकत्रियों को यह समझाया जा रहा है कि बच्चों के पोषण स्तर की पहचान कैसे करें, सही आहार योजना कैसे बनाएं और अभिभावकों को संतुलित भोजन के प्रति कैसे जागरूक करें।
साथ ही, टीकाकरण अभियान, नियमित स्वास्थ्य जांच और गर्भवती महिलाओं की देखभाल जैसे विषयों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों का मानना है कि यदि इन पहलुओं पर सही तरीके से काम किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
🔴 आवासीय प्रशिक्षण का सामाजिक प्रभाव
Anganwadi training Jansath की आवासीय प्रकृति को विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। यहां कार्यकत्रियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, बल्कि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर अपनी कार्यशैली को बेहतर बनाती हैं।
समूह गतिविधियों के माध्यम से नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में एक प्रभावी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
🔴 प्रशासन और समाज के बीच सेतु
प्रशिक्षण के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की वाहक हैं। वे सरकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य करती हैं और बच्चों, महिलाओं तथा जरूरतमंद परिवारों के लिए भरोसे का चेहरा बनती हैं।
Anganwadi training Jansath से यह उम्मीद की जा रही है कि कार्यकत्रियां न केवल अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाएंगी, बल्कि समाज में स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के प्रति जागरूकता का नया अभियान भी शुरू करेंगी।
🔴 स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि हर ब्लॉक और हर गांव तक प्रशिक्षित कार्यकत्रियों की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों का मानना है कि Anganwadi training Jansath जैसी पहलें ग्रामीण विकास के मॉडल के रूप में सामने आ सकती हैं, जिससे पूरे प्रदेश में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
जानसठ में शुरू हुआ यह सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के लिए केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की नई शुरुआत है। बाल विकास, महिला सशक्तिकरण और पोषण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी भूमिका आने वाले समय में समाज की नींव को मजबूत करने में अहम साबित होगी।
