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आगरा पुलिस लाइन में निरीक्षक और दरोगा के करीब 35 सरकारी आवासों पर सिपाहियों का कब्जा है। नियम ताक पर रखकर ये आवास आवंटित किए गए हैं। गोपनीय शिकायत मिलने पर डीसीपी लाइन ने जांच शुरू करा दी है। जांच में मामला सही मिलने पर आवास खाली कराए जाएंगे। दरोगा और निरीक्षकों को आवंटित किए जाएंगे।

पुलिस लाइन में सरकारी आवास पाने के लिए सिपाही से लेकर निरीक्षकों की मारामारी रहती है। पुलिस आयुक्त के पास रोजाना पुलिसकर्मी आवास नहीं मिलने की समस्या लेकर पहुंचते हैं। आरक्षी और मुख्य आरक्षी को टाइप ए-बी आवास आवंटित किए जाते हैं। इनमें एक और दो कमरे के आवास होते हैं।

इसी के साथ दरोगा और निरीक्षक को टाइप सी-डी आवास दिए जा सकते हैं। इनमें तीन या चार कमरे होते हैं। इससे अधिक कमरे वाले आवासों को सहायक पुलिस आयुक्त व अपर पुलिस उपायुक्त को आवंटित किया जाता है। मगर, शिकायत मिली है कि टाइप सी-डी आवास में भी सिपाही रह रहे हैं। ऐसे 35 आवास हैं। इन आवासों में जो पुलिसकर्मी रह रहे हैं, उनका तबादला भी दूसरे जनपद में हो गया है। इसके बावजूद वो आवास खाली नहीं कर रहे हैं। डीसीपी लाइन रवि कुमार ने बताया कि शिकायत मिली है। इस पर एसीपी लाइन से जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

कर्मचारियों को मिलता है आवास भत्ता

पुलिसकर्मियों के सरकारी आवास में रहने के पीछे वजह आवास भत्ता है। पुलिसकर्मियों को आवास भत्ता कम मिलता है। अगर, पुलिसकर्मी किराये के मकान में जाएंगे तो ज्यादा खर्च होगा। मगर, सरकारी में कोई खर्च नहीं होता है। बिजली बिल भी कम आता है।

 



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